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सिंगापुर में भव्य स्तर पर मना हिंदी दिवस

                  सिंगापुर। विश्व साहित्य सेवा संस्थान यानी VSSS–Singapore द्वारा 12 सितंबर 2026 को हार्बरफ्रंट टावर–2 में हिंदी दिवस समारोह का भव्य आयोजन किया गया। भारतीय उच्चायोग, सिंगापुर के सहयोग से आयोजित इस समारोह में हिंदी भाषा, साहित्य, भारतीय संस्कृति, पर्यावरण संरक्षण, शिक्षा और महिला सशक्तिकरण से संबंधित अनेक प्रभावशाली प्रस्तुतियाँ हुईं।

समारोह में भारतीय उच्चायोग, सिंगापुर से श्री अरविंद श्रीवास्तव और श्रीमती ज्योति मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इंडोनेशिया से आयीं और भारत की प्राकृतिक विरासत के क्षेत्र में विश्व रिकॉर्ड धारक इंदु नांदल विशिष्ट अतिथि रहीं। उन्होंने प्रकृति एवं पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता पर अपने विचार व्यक्त किये।

मुख्य अतिथि श्री अरविंद श्रीवास्तव ने हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार और उत्थान में सहयोग देने की बात कही। श्रीमती ज्योति ने अपने मधुर स्वर में ‘वंदे मातरम्’ प्रस्तुत कर उपस्थित श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। आयोजक संस्था की अध्यक्ष अनुसूया साहू ने हिंदी को वैश्विक स्तर पर आगे बढ़ाने तथा नयी पीढ़ी को मातृभाषा से जोड़ने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।

कार्यक्रम का शुभारंभ डिवाइन डांसर्स की टीम द्वारा भगवान गणेश की स्थापना के साथ हुआ। नाट्यरंजिनी सेंटर फ़ॉर डांस एक्सलेंस की कलाकारों ने भरतनाट्यम शैली में गणेश वंदना एवं सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। माधवी देवु के नेतृत्व में कलाकारों ने ‘ऐगिरी नंदिनी’, ‘शिव तांडव’ तथा राधा-कृष्ण नृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियों से मंच को जीवन्त कर दिया।

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शैक्षिक एवं प्रेरक सत्र में डॉ. स्मिता सिंह ने देवनागरी लिपि के महत्त्व पर वक्तव्य दिया। आलोक मिश्रा ने ‘सही राह’ विषय पर प्रेरणादायक प्रसंग प्रस्तुत किये। विशा सेठ ने योग एवं स्वस्थ जीवनशैली के महत्त्व पर प्रकाश डाला। डीएवी की शिक्षिका भुवनेश्वरी राज ने ‘डिजिटल युग में हिंदी की आनंदमयी शिक्षा’ विषय पर अपने विचार रखे।

समारोह में साहित्यिक गतिविधियों के अंतर्गत संगीता सिंह की बालगीतों की पुस्तक का विमोचन किया गया। पुस्तक की समीक्षा कमलेश गौड़ ने प्रस्तुत की। इसी क्रम में लेखिका प्रतिमा सिंह की दो पुस्तकों ‘मेरी कलम मेरा प्रेम’ और ‘एरिथमैटिक आफ़ लव’ का भी विमोचन हुआ। इन पुस्तकों की समीक्षा किंडल किड्स इंटरनैशनल स्कूल की प्रिंसिपल सुश्री निधि पौराणिक ने की।

इसी स्कूल के विद्यार्थियों ने ‘हिंसा से अहिंसा की ओर’ शीर्षक से भगवान बुद्ध और अंगुलिमाल की कथा पर आधारित शिक्षाप्रद नाटिका प्रस्तुत की। नाटिका के माध्यम से बच्चों ने संदेश दिया कि हिंसा विनाश का कारण बनती है, जबकि अहिंसा समाज में शांति, प्रेम और सद्भाव स्थापित करती है।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में दीपा रेड्डी ने अर्धशास्त्रीय नृत्य प्रस्तुत किया, जबकि सर्व फ़ाइन आर्ट्स की कलाकारों ने ‘तराना’ कथक नृत्य से दर्शकों का मन मोह लिया। ग्लो सर्कल की महिला उद्यमियों ने कला प्रदर्शनी के साथ ही बिज़नेस वॉक की प्रस्तुति दी और अपने-अपने व्यवसायों का परिचय दिया। उनकी प्रस्तुति महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता का प्रेरक उदाहरण बनी।

पुरस्कार वितरण मुख्य अतिथि अरविंद श्रीवास्तव एवं ज्योति द्वारा किया गया। इस सत्र का संचालन नीतू गुजराल ने किया। समारोह के अंतर्गत आयोजित काव्यगोष्ठी में सिंगापुर के अनेक कवियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और अपनी विविध रचनाओं से वातावरण को साहित्यिक एवं भावपूर्ण बना दिया। कार्यक्रम का प्रभावशाली मंच-संचालन स्नेहा पारिख एवं श्वेता वर्मा सिंघल ने किया।

कार्यक्रम को अंतरराष्ट्रीय स्वरूप प्रदान करते हुए विभिन्न देशों से हिंदी प्रेमियों ने ऑनलाइन वीडियो संदेशों के माध्यम से शुभकामनाएँ प्रेषित कीं। इनमें दुबई से डॉ. अमृता बिसारिया, भारत से दिनेश बावरा, गोविंद गुप्ता, मीना गोदारा, रोहित शर्मा और अदिति शुक्ला, लंदन से विवेक रंजन श्रीवास्तव तथा अमेरिका से नंदिनी राय शामिल रहे। डॉ. देवेंद्र तोमर और डॉ. आर. कल्पना ने भी ऑनलाइन शुभकामनाएँ दीं। वीडियो निर्माण में पल्लवी सिंह ने विशेष सहयोग प्रदान किया।

समारोह की सफलता में पर्दे के पीछे राम यादव, मनोज, स्मिता कुँवर विवेक, विवेक, परीक्षित शुक्ला, अन्नू मलानी, मिथुन मलानी, श्रेया साहू, शिखा साहू, मन्नू कहार और गौरी सहित सभी स्वयंसेवकों का महत्त्वपूर्ण योगदान रहा। आयोजन-स्थल एवं अन्य व्यवस्थाओं में सहयोग प्रदान करने के लिए जोसलीन लो के प्रति विशेष आभार व्यक्त किया गया।

समारोह के समापन पर VSSS–Singapore ने सभी अतिथियों, कलाकारों, वक्ताओं, साहित्यकारों, शिक्षकों, विद्यार्थियों, सहयोगियों, स्वयंसेवकों और दर्शकों के प्रति आभार प्रकट किया। आयोजन ने ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना को साकार करते हुए यह संदेश दिया कि सामूहिक प्रयासों से हिंदी भाषा और भारतीय संस्कृति को वैश्विक स्तर पर नयी पहचान प्रदान की जा सकती है।

–प्रेस विज्ञप्ति

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