दुर्लभ भारतीय फिल्म क्यों है ‘आँखों देखी’?

21वीं सदी के 25 वर्षों में से वो 25 भारतीय फ़िल्में, जो टर्निंग पॉइंट साबित हुईं। एक युवा फ़िल्मकार की दृष्टि से चयन और इन फ़िल्मों का दस्तावेज़ीकरण… पाक्षिक...

चार्ली चैपलिन: परदे के पीछे की पूरी कहानी

पाक्षिक ब्लॉग चारु शर्मा की कलम से…. चार्ली चैपलिन: परदे के पीछे की पूरी कहानी नमस्कार साथियो, कैसे हैं आप सब? दोस्तो, सिनेमा – विश्वकथा की शृंखला में हम...

मंटो की वह किताब, जिससे जन्मी नयी विधा

पाक्षिक ब्लॉग डॉ. आज़म की कलम से…. मंटो की वह किताब, जिससे जन्मी नयी विधा सआदत हसन मंटो उर्दू कथा साहित्य (अफ़सानवी अदब) के नायक हैं। प्रेमचंद के बाद...

सिनेमा में व्यंग्य: भारतीय संदर्भ में अध्ययन-2

पाक्षिक ब्लॉग अरुण अर्णव खरे की कलम से…. सिनेमा में व्यंग्य: भारतीय संदर्भ में अध्ययन-2         इस लेख की पिछली कड़ी में सामाजिक, राजनीतिक और दार्शनिक...

अख़बारनवीसी: वे एक सौ अड़सठ साल

पेज 1 से आगे………. राजेश बादल की कलम से…. अख़बारनवीसी: वे एक सौ अड़सठ साल दूसरा खंड उर्फ़ तिलक युग बहरहाल! आगे बढ़ते हैं। तिलक युग की पत्रकारिता याने...

अख़बारनवीसी: वे एक सौ अड़सठ साल

‘हिंदी पत्रकारिता के 200 साल’ के संदर्भ में विशेष प्रस्तुति… यह आलेख ‘समग्र भारतीय पत्रकारिता’ ग्रन्थ की समीक्षा नहीं, बल्कि इस नायाब धरोहर के बहाने भारतीय पत्रकारिता के 200...

उर्दू अदब में एक ही मंटो है

गूंज बाक़ी… इस लेख के लेखक उर्दू के मशहूर कहानीकार कृश्न चंदर हैं। यह लेख ‘मंटो साब दोस्तों की नज़र में’ किताब में संकलित है। उर्दू से हिन्दी लिप्यंतरण...
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