May 30, 2025 आब-ओ-हवा अंक अंक – 28 आब-ओ-हवा – अंक – 28 भाषाओं के साथ ही साहित्य, कला और परिवेश के बीच पुल बनाने की इस कड़ी में विशेष नज़र है अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार भारत की... Continue Reading
May 30, 2025 आब-ओ-हवा फ़न की बात अनुवाद में राजनीति और लेखन बनाम अनुवाद अनुवाद में राजनीति और लेखन बनाम अनुवाद प्रसंगवश… कन्नड़ लेखक बानू मुश्ताक़ को अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार मिला तो अनुवाद चर्चा में... Continue Reading
May 30, 2025 आब-ओ-हवा कुछ फ़िल्म कुछ इल्म कहार कहो डोला उतारे कहां… कहार कहो डोला उतारे कहां… फ़िल्मी दुनिया के आकाश में जाने कितने सितारे आते और चले जाते हैं। यूं कहें कि कम रौशनी... Continue Reading
May 30, 2025 आब-ओ-हवा उड़ जाएगा हंस अकेला दत्ताराम: आँसू भरी जीवन की राहों का संगीतकार दत्ताराम: आँसू भरी जीवन की राहों का संगीतकार वर्ष 1958 में आई फ़िल्म परवरिश में राज कपूर पर फ़िल्माया गया गीत ‘आंसू भरी... Continue Reading
May 30, 2025 आब-ओ-हवा उर्दू के शाहकार ग़ालिब भी थे इस लेखक के मुरीद ग़ालिब भी थे इस लेखक के मुरीद “लखनऊ में “फ़साना अजाइब” घर-घर पढ़ा जाता और औरतों, बच्चों को कहानी के तौर पर सुनाया... Continue Reading
May 30, 2025 आब-ओ-हवा क़िस्सागोई देवभूमि में भला कैसा विकास! देवभूमि में भला कैसा विकास! अपने नवीनतम उपन्यास ‘देवभूमि डेवलपर्स’ के लेखक नवीन जोशी किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। वे एक... Continue Reading
May 30, 2025 आब-ओ-हवा तरक़्क़ीपसंद तहरीक की कहकशां ‘असद’ को तुम नहीं पहचानते त’अज्जुब है.. ‘असद’ को तुम नहीं पहचानते त’अज्जुब है.. उर्दू अदब और फ़िल्मी दुनिया में असद भोपाली एक ऐसे बदक़िस्मत शायर-नग़मा निगार हैं, जिन्हें अपने... Continue Reading
May 30, 2025 आब-ओ-हवा समकाल का गीत विमर्श लोक के बीच पहुंचने का रास्ता हो सकता है कवि सम्मेलन? लोक के बीच पहुंचने का रास्ता हो सकता है कवि सम्मेलन? जबकि यह प्रमाणित है कि किसी भी तरह के साहित्य अथवा कला का जीवन लोक के भीतर ही... Continue Reading
May 30, 2025 आब-ओ-हवा शेरगोई मात्रा पतन: कुछ विशेष तथ्य-2 मात्रा पतन: कुछ विशेष तथ्य-2 दो शे’र देखिए :“नहीं एक दिन सर पे आवे क़यामत “हो” जाओगे तुम सख़्तो-ग़म धीरे-धीरे” “ये... Continue Reading
May 30, 2025 आब-ओ-हवा गूंजती आवाज़ें क़ाफ़िया, रदीफ़ और इरशाद सिकंदर क़ाफ़िया, रदीफ़ और इरशाद सिकंदर कभी-कभी ग़ज़ल अपनी रदीफ़ निभाने में इतनी मशगूल हो जाती है कि अपने अस्ल मक़सद से भटकने... Continue Reading