मुशायरे: रिवायत, अहमियत और फ़ायदे

नियमित ब्लॉग डॉ. आज़म की कलम से…. मुशायरे: रिवायत, अहमियत और फ़ायदे मुशायरा उर्दू ज़बान व अदब की एक ज़िंदा और दीप्तिमान रिवायत है, जो शायरी की उन्नति, सांस्कृतिक...

हिन्दी को बनाने दीजिए मुहब्बत का पुल

नियमित ब्लॉग आशीष दशोत्तर की कलम से…. हिन्दी को बनाने दीजिए मुहब्बत का पुल            ज़ुबानें दिलों के बीच एक राब्ता कायम करती हैं। इंसानों...

हिन्दी-उर्दू शायरी में ‘आबो-हवा’

‘आबो-हवा’ का सीधा मतलब जलवायु है और शायरी में यह बाहर और भीतर की कैफ़ियत के हवाले से दर्ज होता रहा है। कहीं-कहीं तो यह प्रतीक भी बन जाता...

शायरी में यार-दोस्त-अहबाब

संकलन : देवदत्त संगेप…. शायरी में यार-दोस्त-अहबाब ये कहाँ की दोस्ती है कि बने हैं दोस्त नासेहकोई चारासाज़ होता कोई ग़म-गुसार होतामिर्ज़ा ग़ालिब ————*———— अगर तुम्हारी अना ही का...
error: Content is protected !!