August 14, 2026 आब-ओ-हवा फ़न की बात साहित्य जनमत बनाने के सिवा करे भी क्या: असग़र वजाहत “साथ, यक़ीं, वाबस्तगी, बिकने थे बेदाम/ आज़ादी जो रख दिया, बंटवारे का नाम”… 1947 में विभाजन की क़ीमत पर आज़ादी मिली। आज हम कितने आज़ाद हैं और कितने विभाजित?... Continue Reading
March 15, 2026 आब-ओ-हवा फ़न की बात हिंदुस्तान में उर्दू अदब का हाल मायूस करता है: ज़किया मशहदी उर्दू अफ़सानानिगारों में महिलाओं के नाम भले ही उंगलियों पर गिने जाने लायक़ हों लेकिन उनका क़द अदब में काफ़ी ऊंचा है। ये नाम बड़े ही एहतराम से लिये... Continue Reading