पर्दा है पर्दा

व्यंग्य मुकेश असीमित की कलम से…. पर्दा है पर्दा               राजा विशेष आरामगाह में आराम फ़रमा रहा था। विशेष इसलिए कि वह पहली...

रंग

ललित व्यंग्य पंकज निनाद की कलम से…. रंग                पूत के पाँव पालने में दिखने लगे थे। वह अपने पिता पर ही गया...
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