साहित्य के ठेकेदारों के नाम एक चिट्ठी

हिंदी लेखक मनोज रूपड़ा के साथ एक कुलपति के आपत्तिजनक बर्ताव के बाद साहित्य जगत में प्रतिवाद का क्या हाल रहा? प्रतिक्रियाओं पर प्रतिक्रियाओं का आलम क्या रहा? इस...

एक शहर में सपने बिकते हैं… शानी का निबंध

गूंज बाक़ी… शानी यानी गुलशेर ख़ान शानी (16 मई 1933—10 फ़रवरी 1995) हिंदोस्तानी साहित्य के बावक़ार नाम रहे हैं। काला जल, सांप और सीढ़ी, सब एक जगह जैसे अफ़सानों...

आलोचक वीरेंद्र यादव होने के मायने

शख़्सियत को जानें चंद्रेश्वर की कलम से…. आलोचक वीरेंद्र यादव होने के मायने             अग्रज लेखक-आलोचक वीरेन्द्र यादव से मेरी पहली मुलाक़ात वर्ष 1989...

समर शेष है… और चुप्पी विशेष?

प्रतिरोध पंकज निनाद की कलम से…. समर शेष है…               विगत 7 जनवरी को बिलासपुर में गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय और साहित्य अकादमी...

बहुत याद आएंगे अवधेश प्रीत…

श्रद्धांजलि ग़ज़ाला तबस्सुम की कलम से…. बहुत याद आएंगे अवधेश प्रीत…            कजरी, अली मंज़िल, चांद के पार एक चाभी, अम्मी जैसी अनगिनत कहानियां और...
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