ज़रूरत जवाबदेह पत्रकारिता की, यह हो कैसे?

— एल्गोरिदम और प्रो-बिज़नेस नैरैटिव पर आधारित पत्रकारिता का वर्तमान व भविष्य — पत्रकारिता के पतन के लिए ज़िम्मेदार कौन है और किस तरह? — संपादक गुम हुआ और...

मेरे भीतर की स्त्री

मेरे हिस्से का क़िस्सा… आब-ओ-हवा पर एक विशेष शृंखला। उम्र और सृजन का यादगार कथानक लिख चुके हस्ताक्षरों की कहानी, उन्हीं की जुबानी। इस सिलसिले में दूसरी दास्तान एक...

अख़बारनवीसी: वे एक सौ अड़सठ साल

पेज 1 से आगे………. राजेश बादल की कलम से…. अख़बारनवीसी: वे एक सौ अड़सठ साल दूसरा खंड उर्फ़ तिलक युग बहरहाल! आगे बढ़ते हैं। तिलक युग की पत्रकारिता याने...

अख़बारनवीसी: वे एक सौ अड़सठ साल

‘हिंदी पत्रकारिता के 200 साल’ के संदर्भ में विशेष प्रस्तुति… यह आलेख ‘समग्र भारतीय पत्रकारिता’ ग्रन्थ की समीक्षा नहीं, बल्कि इस नायाब धरोहर के बहाने भारतीय पत्रकारिता के 200...

सत्ता के ज़ुल्म से लड़ी कलम यानी गणेश शंकर विद्यार्थी

बलिदान दिवस पर प्रमोद मलय की कलम से…. सत्ता के ज़ुल्म से लड़ी कलम यानी गणेश शंकर विद्यार्थी              अंग्रेज़ी शासन से मुक्ति और...

हिंदी की दैनिक पत्रकारिता का उत्कर्ष

गूंज बाक़ी… अंग्रेज़ी के दैनिक टाइम्स आफ़ इंडिया के लिए हिंदी की दैनिक पत्रकारिता के विषय पर राजेंद्र माथुर ने दो लेखों में अपने दृष्टिकोण लिखे थे, जो आज...
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