— एल्गोरिदम और प्रो-बिज़नेस नैरैटिव पर आधारित पत्रकारिता का वर्तमान व भविष्य — पत्रकारिता के पतन के लिए ज़िम्मेदार कौन है और किस तरह? — संपादक गुम हुआ और...
मेरे हिस्से का क़िस्सा… आब-ओ-हवा पर एक विशेष शृंखला। उम्र और सृजन का यादगार कथानक लिख चुके हस्ताक्षरों की कहानी, उन्हीं की जुबानी। इस सिलसिले में दूसरी दास्तान एक...
‘हिंदी पत्रकारिता के 200 साल’ के संदर्भ में विशेष प्रस्तुति… यह आलेख ‘समग्र भारतीय पत्रकारिता’ ग्रन्थ की समीक्षा नहीं, बल्कि इस नायाब धरोहर के बहाने भारतीय पत्रकारिता के 200...
गूंज बाक़ी… अंग्रेज़ी के दैनिक टाइम्स आफ़ इंडिया के लिए हिंदी की दैनिक पत्रकारिता के विषय पर राजेंद्र माथुर ने दो लेखों में अपने दृष्टिकोण लिखे थे, जो आज...