March 15, 2026 आब-ओ-हवा कला कोलाज लोककला में क्या कुछ नया होता ही नहीं? पाक्षिक ब्लॉग शम्पा शाह की कलम से…. लोककला में क्या कुछ नया होता ही नहीं? पिछली कड़ी में हमने कलावंत कुम्हार कालीपद जी के उस प्रसंग... Continue Reading
February 28, 2026 आब-ओ-हवा कला कोलाज पारंपरिक कलाएं बनाम नयी अभिव्यक्ति पाक्षिक ब्लॉग शम्पा शाह की कलम से…. सोनाबाई और उनके मौन का विस्तार सन् 1985 के आस-पास, एक दिन, हुआ यूँ कि कुछ संथाली युवक... Continue Reading
December 31, 2025 आब-ओ-हवा कला कोलाज स्वर, रंग-रूप, भंगिमा, आकाश और अन्य तत्व पाक्षिक ब्लॉग शम्पा शाह की कलम से…. स्वर, रंग-रूप, भंगिमा, आकाश और अन्य तत्व उन दिनों भोपाल में रहना वाक़ई सौभाग्य था। कभी... Continue Reading