नियमित ब्लॉग डॉ. आज़म की कलम से…. मुशायरे: रिवायत, अहमियत और फ़ायदे मुशायरा उर्दू ज़बान व अदब की एक ज़िंदा और दीप्तिमान रिवायत है, जो शायरी की उन्नति, सांस्कृतिक...
प्रसंगवश: दीवाली के बाद आने वाली दूज पर कायस्थ समुदाय में चित्रगुप्त पूजन की परंपरा है। इस तिथि पर कायस्थ समुदाय में विशेष रूप काग़ज़, कलम और दवात की...