सिनेमा को ‘वैचारिक’ बनाने वाला पहला फ़िल्मकार

पहले विश्वयुद्ध के बीच रूस की क्रांति ने एक फ़िल्मकार को उभारा, जिसने पहली बार सिनेमा को वैचारिकी का माध्यम बनाने का सफ़र शुरू किया। इस सफ़र में वह...

ओडिसी: इस वक़्त महाकाव्य का पुनर्पाठ?

नियमित कॉलम भवेश दिलशाद की कलम से…. ओडिसी: इस वक़्त महाकाव्य का पुनर्पाठ?              महाकाव्यों का सबसे बड़ा विरसा होता है कि ये देश...

लगान: क्या है उपलब्धि और विरासत?

21वीं सदी के 25 वर्षों में से वो 25 भारतीय फ़िल्में, जो टर्निंग पॉइंट साबित हुईं। एक युवा फ़िल्मकार की दृष्टि से चयन और इन फ़िल्मों का दस्तावेज़ीकरण… पाक्षिक...

एक शख़्स का जुनून यानी भारतीय सिनेमा की नींव

पाक्षिक ब्लॉग चारु शर्मा की कलम से…. एक शख़्स का जुनून यानी भारतीय सिनेमा की नींव             नमस्कार साथियो, हम उम्मीद करते हैं आप...

ईरानी सिनेमा में प्रतिरोध और मानवतावाद

प्रासंगिकता के चलते आब-ओ-हवा पर प्रस्तुति के लिए ‘हम देखेंगे’ पत्र से विशेष रूप से प्राप्त, ईरानी सिनेमा पर यह चर्चा सुधन्वा देशपांडे की कलम से निकली है, जिसका...

चार्ली चैपलिन: परदे के पीछे की पूरी कहानी

पाक्षिक ब्लॉग चारु शर्मा की कलम से…. चार्ली चैपलिन: परदे के पीछे की पूरी कहानी नमस्कार साथियो, कैसे हैं आप सब? दोस्तो, सिनेमा – विश्वकथा की शृंखला में हम...

विश्व-सिनेमा की पहली महिला फिल्मकार

पाक्षिक ब्लॉग चारु शर्मा की कलम से…. विश्व-सिनेमा की पहली महिला फिल्मकार           नमस्कार साथियो, उम्मीद है आपको विश्व सिनेमा के इतिहास की यह सीरीज़...

क्रांति थी पहली कथा-फ़िल्म.. उसी की कहानी

पाक्षिक ब्लॉग चारु शर्मा की कलम से…. क्रांति थी पहली कथा-फ़िल्म.. उसी की कहानी               नमस्कार दोस्तो, हम फिर हाज़िर हैं पिछली कहानी...

कितनी फ़िल्मी है हमारी डिप्लोमैसी!

पाक्षिक ब्लॉग भवेश दिलशाद की कलम से…. कितनी फ़िल्मी है हमारी डिप्लोमैसी!              विदेश नीति, कूटनीतिक संबंधों में हम इस क़दर कमज़ोर हैं कि...

विश्व सिनेमा का इज़रायली नैरैटिव समझें

विश्व सिनेमा का इज़रायली नैरैटिव समझें              अमेरिका, इज़रायल, ईरान, फ़लीस्तीन… यानी संघर्षरत क्षेत्रों के बारे में सोशल मीडिया पर लगातार लेखन और विचार...
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