
प्रयागराज में एसआरएन अस्पताल के नामकरण को लेकर आंदोलन नौवें दिन भी जारी, क्या भुला दी जाएगी शहीद रोशन सिंह की कीर्तिगाथा?
शहीद के लिए सैकड़ों ने किया प्रदर्शन, प्रशासन मौन
प्रयागराज। आज़ादी की सालगिरह के जश्न से ऐन पहले एक शहीद को सम्मान दिलाने के लिए कुछ सामाजिक कार्यकर्ता मोर्चे पर डटे हुए हैं। मोतीलाल नेहरू राजकीय मेडिकल कॉलेज से संबद्ध मंडलीय चिकित्सालय स्वरूप रानी नेहरू (SRN अस्पताल) का नाम बदलकर ‘अमर शहीद ठाकुर रोशन सिंह’ के नाम पर रखने की मांग को लेकर महुआ डाबर संग्रहालय परिवार के तत्वावधान में चल रहा अनिश्चितकालीन धरना गुरुवार को नौवें दिन भी जारी रहा। आंदोलन को लेकर प्रदर्शनकारियों का कहना है जिस स्थान पर ठाकुर रोशन सिंह ने देश की आज़ादी के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया, उस स्थान की पहचान उनके नाम से होनी चाहिए।
सैकड़ों चिकित्सक-कर्मचारी पहुंचे, शहीद को दी श्रद्धांजलि
गुरुवार को अमर शहीद ठाकुर रोशन सिंह के बलिदान स्थल पर मोतीलाल नेहरू राजकीय मेडिकल कॉलेज और मंडलीय चिकित्सालय ‘स्वरूप रानी नेहरू अस्पताल’ के सैकड़ों चिकित्सक और कर्मचारी पहुंचे। सभी ने सिर झुकाकर महान क्रांतिकारी को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान कहा गया कि ठाकुर रोशन सिंह ने इसी स्थान पर हंसते-हंसते देश के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया था।

मलाका जेल में दी गयी थी फांसी
ग़ौरतलब है कि इसी मलाका जेल में अंग्रेज़ी हुकूमत ने काकोरी केस के अमर नायक ठाकुर रोशन सिंह को फांसी दी थी। क़रीब आठ महीने तक वह फांसीघर के पास स्थित काल कोठरी में क़ैद रखे गये। 19 दिसंबर 1927 की सुबह उन्होंने फांसी का फंदा चूमकर देश के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिये और अमर हो गये।
धरनारत लोगों का कहना है ठाकुर रोशन सिंह के बलिदान के क़रीब 20 वर्ष बाद देश आज़ाद हुआ, लेकिन आज़ादी के बाद उनके बलिदान स्थल पर ही उन्हें भुला दिया गया।
बलिदान स्थल का नाम रोशन हो
महुआ डाबर संग्रहालय के महानिदेशक डॉ. शाह आलम राना ने कहा कि आगामी 19 दिसंबर से ठाकुर रोशन सिंह का बलिदान शताब्दी वर्ष शुरू हो रहा है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या हम उस महान बलिदानी परंपरा की कीर्ति की रक्षा नहीं कर सकते, जिसने अपना सर्वोच्च बलिदान देकर देश को स्वतंत्रता की सौग़ात दिलायी?
उन्होंने कहा पूर्व की सरकारों से जो अनदेखी हुई, उसे अब तत्काल सुधारा जाना चाहिए। जिस धरती पर शहीद का ख़ून गिरा, उसका नाम शहीद के नाम से दुनिया में रोशन होना चाहिए।
शांतिपूर्ण धरना, फिर भी प्रशासन मौन
डॉ. अवनीश सिंह ने कहा पिछले नौ दिनों से शांतिपूर्ण धरना चल रहा है, लेकिन ज़िला प्रशासन और सरकार की ओर से अभी तक कोई ठोस बातचीत नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि आंदोलनकारी किसी व्यक्तिगत लाभ की मांग नहीं कर रहे हैं, बल्कि बलिदान का सम्मान चाहते हैं। उन्होंने कहा गोरखपुर, गोंडा और अयोध्या में यदि शहीदों के नाम पर आयोजन हो सकते हैं, तो प्रयागराज की इस पवित्र माटी को क्यों भुलाया जा रहा है?
धरने में प्रमुख रूप से सोनू चौधरी, राबिन सिंह, भूपेश यादव, शिवांग त्रिपाठी, अग्निवेश तिवारी और सूरज सिंह सहित बड़ी संख्या में छात्र, युवा और नागरिक दिन भर मौजूद रहे। आंदोलनकारियों की मांग है कि SRN अस्पताल का नाम बदलकर अमर शहीद ठाकुर रोशन सिंह के नाम पर रखा जाये, ताकि जिस स्थान पर महान क्रांतिकारी ने देश के लिए अपने प्राण न्योछावर किये, उसकी पहचान को संरक्षित करने की दिशा में एक क़दम तो बढ़े।
-प्रैस विज्ञप्ति
