
तंत्र के जंतर के विरुद्ध लोक का मंतर
संसद के नज़दीक दिल्ली स्थित जंतर मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी के बैनर तले चल रहे विरोध प्रदर्शन को पुलिस और सशस्त्र बलों द्वारा बेरहमी से कुचला गया और दमन दूसरे दिन भी जारी है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफ़े की मांग के साथ ही परीक्षाओं में लगातार गड़बड़ियों जैसे मुद्दे जो अव्यवस्था, भ्रष्टाचार और दमन से जुड़े हैं, उनके ख़िलाफ इस प्रदर्शन का देशव्यापी असर होने की ख़बरें हैं। कुछ प्रतीकात्मक और कुछ बयानिया तस्वीरों की ज़ुबानी इस विद्रोह की कहानी…

यहां प्रस्तुत सभी तस्वीरें सोशल मीडिया से साभार ली गयी हैं। जंतर मंतर के धरने प्रदर्शन की तस्वीरों के बीच एक यह चित्र भी, जिसमें सोनम वांगचुक दिख रहे हैं, सोशल मीडिया पर पोस्ट हुआ।

युवाओं पर पुलिस की क्रूर कार्रवाई और दूसरे चित्र में विरोध के पोस्टरों व गीतों के साथ शांतिपूर्वक बैठे युवा।

‘प्रतिरोध अमर रहे’ का बैनर लिये खड़े प्रदर्शनकारी युवा। दूसरे चित्र में प्रदर्शनकारी के हाथ में एक प्रतीकात्मक पोस्टर।

एक प्रदर्शनकारी अपने हाथों में यह तस्वीर लिये था, जिसे कैमरे ने क़ैद कर लिया।

प्रदर्शनकारियों को खदेड़े जाने के बाद खोये हुए जूते-चप्पलों को एक जगह इकट्ठा किया गया। इस तस्वीर पर सोशल मीडिया पर चुटकियां ली गयीं कि ‘आप जानते ही हैं युवा किसके लिए छोड़ गये हैं ये जूते’।

प्रदर्शनकारी युवाओं ने अपने संदेशों के लिए कई माध्यम चुने। पोस्टर लिखे, टीशर्ट प्रिंट करवायीं और सड़क के बीच लगे पत्थरों, दीवारों आदि पर भी अपने ‘मन की बात’ लिखकर चले गये।

ऐसी तस्वीरों ने सवाल उठाये कि प्रदर्शनकारियों पर लाठियां भांजने के लिए भाड़े की पुलिस और बल बुलवाया गया। सोशल मीडिया पर यह चर्चा बनी हुई है कि भाड़े की वर्दी में पुलिस की जगह गुंडे युवाओं के साथ बर्बरता कर रहे थे।

क्या आप अपने बच्चों को देश की आबादी में सिर्फ़ एक नंबर बना रहे हैं? ऐसे सवाल कई पोस्टरों में पूछे गये। किसी पोस्टर में यह भी ज़ाहिर किया गया कि यह विरोध प्रदर्शन किसी के फ़ंड से नहीं चल रहा है।

विरोध प्रदर्शन की कुछ और झलकियां। दायें तरफ़ के चित्र में दिखता है एक युवा मोदी का मुखौटा पहनकर आया, सोशल मीडिया पर इस चित्र के कैप्शन में लिखा गया, ‘कौन आया कौन आया… चोर आया चोर आया’।

जंतर मंतर पर सीजेपी के प्रदर्शन ने सुर्ख़ियां बटोरीं और इस बीच कुछ ख़बरों से निगाह हट गयी। जैसे बंगाल में राहुल सांकृत्यायन की मूर्ति ध्वस्त करना रहा (क्लिक करें: प्रतिमाएं और स्मृति-राजनीति) हो या फिर केन बेतवा लिंक परियोजना के ख़िलाफ़ आदिवासियों का प्रदर्शन। इस चित्र में प्रदर्शनकारी आदिवासी।

विरोध प्रदर्शन की तमाम हलचलों के बीच ख़बर है कि बुधवार 22 जुलाई को भी जंतर मंतर पर प्रदर्शनकारियों को चुप करवाने की बलपूर्वक कोशिशें जारी हैं। इस पूरे घटनाक्रम में लोकतांत्रिक मूल्यों की चर्चा ज़ोरों पर है। आबओहवा लोक और विरोध प्रदर्शन के संवैधानिक अधिकार के समर्थन में आवाज़ बुलंद करता है।
