July 15, 2026 आब-ओ-हवा जो है सो है ओम निश्चल: हिंदी ग़ज़ल में वरिष्ठों का नौसीखियापन! पाक्षिक ब्लॉग ज्ञानप्रकाश पांडेय की कलम से…. ओम निश्चल: हिंदी ग़ज़ल में वरिष्ठों का नौसीखियापन! मेरे गाँव में कहावत है- ‘नाऊ की बारात में... Continue Reading
July 30, 2025 आब-ओ-हवा ग़ज़ल: लौ और धुआं ग़ज़ल: ख़ास और आम के बीच की बात आशीष दशोत्तर की कलम से…. ग़ज़ल: ख़ास और आम के बीच की बात ख़ुदा-ए-सुख़न मीर कहते हैं-शेर मेरे हैं गो ख़वास-पसंदपर मुझे... Continue Reading