नीरज की दुर्लभ कविता – मिट्टी की कुर्बानी

गूंज बाक़ी… हिंदी कविता और गीत के प्रसिद्ध हस्ताक्षर गोपालदास नीरज की एक भूली-बिसरी रचना। यह रचना ‘सुमित्रा’ पत्रिका के सितम्बर 1952 अंक में ‘मिट्टीवाला’ शीर्षक से प्रकाशित हुई...

अगर तीसरा युद्ध हुआ तो? …नीरज की यादगार कविता

गूंज बाक़ी… दुनिया के हालात के मद्देनज़र कैसे कोई कविता प्रासंगिक हो जाती है! गोपालदास नीरज की एक कविता जैसे फिर ज़िंदा हो गयी है। दशकों पहले कविता पढ़ते...

निराला और वीणावादिनी

निराला और वीणावादिनी महाप्राण निराला के काव्य में ​वीणावादिनी की गूंज, आभा और उपस्थिति अपरम्पार दिखती है। वह भारती वंदना करते हैं तो उसका स्वरूप भी वीणावादिनी का है,...
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