प्रासंगिकता के चलते आब-ओ-हवा पर प्रस्तुति के लिए ‘हम देखेंगे’ पत्र से विशेष रूप से प्राप्त, ईरानी सिनेमा पर यह चर्चा सुधन्वा देशपांडे की कलम से निकली है, जिसका...
21वीं सदी के 25 वर्षों में से वो 25 भारतीय फ़िल्में, जो टर्निंग पॉइंट साबित हुईं। एक युवा फ़िल्मकार की दृष्टि से चयन और इन फ़िल्मों का दस्तावेज़ीकरण… पाक्षिक...
लेखा-जोखा मानस की कलम से…. 2025 का राजनीतिक सिनेमा: राष्ट्रवाद-प्रतिक्रिया-मनोरंजन की नयी त्रयी पिछले कुछ वर्षों में सिनेमा के विषयों में राजनीति और...