कॉकरोच पार्टी और बेसुरे दौर में ‘मेलोडी’ राग

व्यंग्य विवेक रंजन श्रीवास्तव की कलम से…. कॉकरोच पार्टी और बेसुरे दौर में ‘मेलोडी’ राग             दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के सियासी अखाड़े...

नीरज की दुर्लभ कविता – मिट्टी की कुर्बानी

गूंज बाक़ी… हिंदी कविता और गीत के प्रसिद्ध हस्ताक्षर गोपालदास नीरज की एक भूली-बिसरी रचना। यह रचना ‘सुमित्रा’ पत्रिका के सितम्बर 1952 अंक में ‘मिट्टीवाला’ शीर्षक से प्रकाशित हुई...

नेपोटिज़्म बनाम नैसर्गिक प्रतिभा

विवेक रंजन श्रीवास्तव की कलम से…. नेपोटिज़्म बनाम नैसर्गिक प्रतिभा              जब कोई वरिष्ठ संपादक या साहित्यकार यह कहता है कि सच्चे लेखक को...

ह्यूमनकाइंड: आशावाद का व्यवस्थित इतिहास

(विधाओं, विषयों व भाषाओं की सीमा से परे… मानवता के संसार की अनमोल किताब -धरोहर- को हस्तांतरित करने की पहल। जीवन को नये अर्थ, नयी दिशा, नयी सोच देने...

अंक – 51

आब-ओ-हवा – अंक – 51 भाषाओं के साथ ही साहित्य, कला और परिवेश के बीच पुल बनाने की इस कड़ी में चुनाव के बाद के परिदृश्य का जाएज़ा विषय...

बोलती, ठहरती, दिखती, छुपती आवाज़

पाक्षिक ब्लॉग आशीष दशोत्तर की कलम से…. बोलती, ठहरती, दिखती, छुपती आवाज़ ग़ौर से सुनिए। कोई आवाज़ दे रहा है। यह आवाज़ तो जानी-पहचानी-सी लग रही है। कब सुनी...
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