‘दुनिया मुट्ठी में’ या मुट्ठी से फिसलती दुनिया?

पाक्षिक ब्लॉग आशीष दशोत्तर की कलम से…. ‘दुनिया मुट्ठी में’ या मुट्ठी से फिसलती दुनिया? इंसानी ज़िंदगी में बहुत ज़्यादा तब्दीलियां हो चुकी हैं। किसी वक़्त जब टेलीविज़न आया...

दुनिया भर के चहेते शायर थे बशीर बद्र

डॉ. नौमान की कलम से…. दुनिया भर के चहेते शायर थे बशीर बद्र..            ‘आमद’, ‘इकाई’, ‘इमेज’ शेरी संकलनों के ख़ालिक (रचनाकार) अन्तरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त, पद्मश्री...

बोलती, ठहरती, दिखती, छुपती आवाज़

पाक्षिक ब्लॉग आशीष दशोत्तर की कलम से…. बोलती, ठहरती, दिखती, छुपती आवाज़ ग़ौर से सुनिए। कोई आवाज़ दे रहा है। यह आवाज़ तो जानी-पहचानी-सी लग रही है। कब सुनी...

शायरी के निशाने पर ‘कुर्सियाँ’

चुनावी मौसम यूं तो मुल्क में कभी ख़त्म होता नहीं, फिर भी ताजपोशी की हालिया सुर्ख़ियों से ‘कुर्सी’ लफ़्ज़ एकदम से ज़ेह्नों में ताज़ा हो चला है। इस लफ़्ज़...

आज रंग है….

हिंदुस्तान यानी एक रंग-रंगीली सरगम। हर सुर, हर रंग एक-दूसरे में घुला-मिला हुआ, रचा-बसा हुआ। यही इंद्रधनुषी धुन देश की तहज़ीब है। प्यार, वाबस्तगी और एका के पैग़ाम सभी...

परचमों में क़ैद होकर रह गया हर रंग है

पाक्षिक ब्लॉग आशीष दशोत्तर की कलम से…. परचमों में क़ैद होकर रह गया हर रंग है रंग ज़िन्दगी को तालीम भी देते हैं और तरबीयत भी। रंग होंठों पर...

दृष्टिकोण, आंदोलन, मौलिकता और क़ैफ़ी आज़मी

पाक्षिक ब्लॉग सलीम सरमद की कलम से…. दृष्टिकोण, आंदोलन, मौलिकता और क़ैफ़ी आज़मी          ‘गूंजती आवाज़ें’ में प्रस्तुत आलेख मेरी स्मृति के पन्ने थे, जिन्हें मैं...

सुबह और सांझ के माथे पर ग़मों की गठरी

पाक्षिक ब्लॉग आशीष दशोत्तर की कलम से…. सुबह और सांझ के माथे पर ग़मों की गठरी             अलसुबह अरमानों को अपनी कांख में दबाकर...

इल्म, तजुर्बा, थ्योरी और अख़्तरुल ईमान

पाक्षिक ब्लॉग सलीम सरमद की कलम से…. इल्म, तजुर्बा, थ्योरी और अख़्तरुल ईमान             ज़िंदगी मुझसे कह रही थी कि उम्र सवालों की जा...
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