हिंदी पत्रकारिता नहीं, मानसिकता के 200 साल

हिंदी पत्रकारिता के 200 साल के सफ़र पर यह उड़ती-सी नज़र उस शख़्स की है, जिसने 1996 से 2019 तक सक्रिय तौर पर ज़िले से लेकर राजधानी तक हिंदी...

ज़रूरत जवाबदेह पत्रकारिता की, यह हो कैसे?

— एल्गोरिदम और प्रो-बिज़नेस नैरैटिव पर आधारित पत्रकारिता का वर्तमान व भविष्य — पत्रकारिता के पतन के लिए ज़िम्मेदार कौन है और किस तरह? — संपादक गुम हुआ और...

शायरी के निशाने पर ‘अख़बार’

हिंदी पत्रकारिता दिवस… 200 साल की हो गयी हिंदी की पत्रकारिता और कहां से कहां पहुंच गयी! भले ही अब मीडिया जैसे शब्द प्रच​लन में हैं पर अख़बार शब्द...

अख़बारनवीसी: वे एक सौ अड़सठ साल

पेज 1 से आगे………. राजेश बादल की कलम से…. अख़बारनवीसी: वे एक सौ अड़सठ साल दूसरा खंड उर्फ़ तिलक युग बहरहाल! आगे बढ़ते हैं। तिलक युग की पत्रकारिता याने...

अख़बारनवीसी: वे एक सौ अड़सठ साल

‘हिंदी पत्रकारिता के 200 साल’ के संदर्भ में विशेष प्रस्तुति… यह आलेख ‘समग्र भारतीय पत्रकारिता’ ग्रन्थ की समीक्षा नहीं, बल्कि इस नायाब धरोहर के बहाने भारतीय पत्रकारिता के 200...

भारत में महिला पत्रकारिता, एक दस्तावेज़

भारत में महिलाओं की पत्रकारिता के पूरे इतिहास और वर्तमान को दर्ज करती हुई किताब है ‘आधी दुनिया की पूरी पत्रकारिता’। मंगला अनुजा की यह पुस्तक महिला पत्रकारिता के...

माखनलाल चतुर्वेदी: जिन्हें बहुत मानते थे गांधीजी

शख़्सियत को जानिए प्रमोद दीक्षित मलय की कलम से…. माखनलाल चतुर्वेदी: जिन्हें बहुत मानते थे गांधीजी             प्राथमिक शिक्षा के दौरान एक कविता पढ़ने...
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