भारतीय दर्शन और पर्यावरण चेतना

नियमित ब्लॉग विवेक रंजन श्रीवास्तव की कलम से…. भारतीय दर्शन और पर्यावरण चेतना             भारतीय संस्कृति में प्रकृति जड़ वस्तु, उपभोग की सामग्री या...

मुशायरे: रिवायत, अहमियत और फ़ायदे

नियमित ब्लॉग डॉ. आज़म की कलम से…. मुशायरे: रिवायत, अहमियत और फ़ायदे मुशायरा उर्दू ज़बान व अदब की एक ज़िंदा और दीप्तिमान रिवायत है, जो शायरी की उन्नति, सांस्कृतिक...

संस्कृतियों का संगम: ऐतिहासिकता और आधुनिक संदर्भ

नियमित ब्लॉग नमिता सिंह की कलम से…. संस्कृतियों का संगम: ऐतिहासिकता और आधुनिक संदर्भ              डाॅ. भोलाशंकर व्यास की कृति ‘समुद्र संगम’ को, जो...

वशिष्ठ अनूप व आत्ममुग्धता की शिकार हिंदी ग़ज़ल

नियमित ब्लॉग ज्ञानप्रकाश पांडेय की कलम से…. वशिष्ठ अनूप व आत्ममुग्धता की शिकार हिंदी ग़ज़ल            हां! कुछ अपवादों को छोड़ दिया जाये तो हिंदी...

हिन्दी को बनाने दीजिए मुहब्बत का पुल

नियमित ब्लॉग आशीष दशोत्तर की कलम से…. हिन्दी को बनाने दीजिए मुहब्बत का पुल            ज़ुबानें दिलों के बीच एक राब्ता कायम करती हैं। इंसानों...

सपने, हुनर, क़िस्मत और लगन

मेरे हिस्से का क़िस्सा… आब-ओ-हवा पर विशेष शृंखला। उम्र और सृजन का यादगार कथानक लिख चुके हस्ताक्षरों की कहानी, उन्हीं की जुबानी। तीसरी दास्तान एक ऐसे फ़नकार की जो...

गूंज | हरियश राय लिखित कहानी

सदियों से जन-मानस में शौर्य गाथा सुनाकर रग-रग में बिजली भर देने वाले आल्हा गायन ने कैसे दम तोड़ दिया? रोज़ी या कला के अंत: संघर्ष में घुटते लोक...

गुजराती कहानी हिंदी में: मौलश्री ही क्यों?

कुछ बातें कभी पुरानी नहीं होतीं और उन्हें कहने के लिए कोई अलंकृत भाषा की ज़रूरत भी नहीं होती। तेज़ बहती धारा में एक कंकड़ समर्पित होने की हल्की-सी...
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