निराला और वीणावादिनी महाप्राण निराला के काव्य में वीणावादिनी की गूंज, आभा और उपस्थिति अपरम्पार दिखती है। वह भारती वंदना करते हैं तो उसका स्वरूप भी वीणावादिनी का है,...
याद बाक़ी… यह संस्मरण अकार-68 में प्रकाशित है, जो इस पत्रिका के सहायक संपादक श्री जीवेश के सौजन्य से साभार प्राप्त हुआ। ‘तुम भूल न जाओ उनको…’ बस इसी...
रंगकर्मी आलोक चटर्जी को गये एक बरस हो गया। भवेश दिलशाद की यह टिप्पणी आब-ओ-हवा के अंक 19 में प्रकाशित हुई थी, जिसे प्रसंगवश यहां प्रस्तुत किया जा रहा...
अपनी संक्षिप्त फ़लीस्तीन यात्रा के दौरान विनीत तिवारी ने आयदा टूमा सुलेमान के साथ जेरूसलम में बातचीत की, यात्रा से लौटकर उसे लिपिबद्ध किया है। लेखक द्वारा उपलब्ध करवाया...