प्रेमचंद जयंती, जगदलपुर, premchand jayanti, students, jagdalpur

प्रेमचंद के बहाने नयी पीढ़ी से साहित्य की बातें

महान कथाकार एवं उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद की जयंती साहित्य की दुनिया में एक ऐसा अवसर है, जो आज भी किसी उत्सव से कम नहीं। देश और ख़ासकर हिंदीभाषी क्षेत्रों में इसे हर साल रचनात्मक ढंग से मनाने के उपक्रम होते ही हैं। प्रगतिशील लेखक संघ, जगदलपुर द्वारा हम अकादमी में इस साल विद्यार्थियों के बीच साहित्यिक चेतना के संवर्धन, सृजनात्मक अभिव्यक्ति के विकास तथा नयी पीढ़ी को हिंदी साहित्य से जोड़ने के उद्देश्य से कहानी, निबंध एवं भाषण प्रतियोगिताओं का भव्य आयोजन इसी कड़ी का एक अहम हिस्सा रहा।

यह आयोजन इन मायनों में ख़ास रहा कि इसका मूल उद्देश्य विद्यार्थियों को प्रेमचंद के साहित्य, उनके मानवीय सरोकारों, सामाजिक चेतना एवं साहित्यिक विरासत से परिचित कराना तथा उनमें पढ़ने-लिखने की रुचि को प्रोत्साहित करना था।

कार्यक्रम का एक विशेष एवं उल्लेखनीय पक्ष रहा प्रगतिशील लेखक संघ की अध्यक्षा खुदेजा खान का विद्यार्थियों के प्रति आत्मीय एवं प्रेरणादायी दृष्टिकोण। उन्होंने विद्यार्थियों को निरंतर पढ़ने और लिखने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि प्रत्येक बच्चे के भीतर कोई न कोई रचनात्मक प्रतिभा अवश्य होती है। आवश्यकता केवल उस प्रतिभा को पहचानने, उसे अवसर देने और निरंतर अभ्यास के माध्यम से निखारने की है। उनके शब्दों ने विद्यार्थियों में आत्मविश्वास का संचार किया और उन्हें अपनी लेखन क्षमता को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया।

सैकडों विद्यार्थियों के बीच हुए इस आयोजन में खुदेजा खान ने विद्यार्थियों की लेखन शैली का परीक्षण किया, उनकी अभिव्यक्ति, विचारों की मौलिकता, भाषा-शैली, विषय की समझ एवं प्रस्तुतिकरण को ध्यानपूर्वक देखा तथा उनकी योग्यता एवं रुचि के अनुरूप प्रतिभाओं का चयन किया। इस पूरी प्रक्रिया में उनका उद्देश्य केवल प्रतियोगिता के विजेताओं का चयन करना नहीं, बल्कि भविष्य के संभावित साहित्यकारों की प्रतिभा को पहचानना और उन्हें साहित्य की ओर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना रहा।

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विद्यार्थियों की रचनाओं को गंभीरता से पढ़ना, उनकी क्षमता को समझना और उन्हें उनकी योग्यता के अनुसार मार्गदर्शन देना प्रमाण है कि नयी पीढ़ी को साहित्य की ओर पल्लवित करने के प्रयास अब भी किये जा रहे हैं। इससे कोई अंतर नहीं पड़ता कि आप यह काम किसी राजधानी में कर रहे हैं या फिर किसी छोटे शहर या क़स्बे में।

गया कल और आता कल

नयी पीढ़ी के बीच प्रो. एम. अली सैयद एवं स्मृति मिश्रा ने प्रेमचंद के साहित्यिक अवदान के बारे में बातचीत भी की और निष्कर्षत: कहा कि प्रेमचंद का साहित्य केवल कहानी और उपन्यास तक सीमित नहीं है, बल्कि वह भारतीय समाज का जीवंत दस्तावेज़ है। उन्होंने अपने साहित्य में किसान, मज़दूर, स्त्री, वंचित और सामान्य जनजीवन की समस्याओं को जिस संवेदनशीलता के साथ अभिव्यक्त किया, वह आज भी हमें भारत के मानस और इतिहास के प्रति एक समझ देता है।

प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों का उत्साह देखते ही बना। कहानी प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने अपनी कल्पनाशीलता और संवेदनशीलता को पंख दिये तो, निबंध प्रतियोगिता में विभिन्न विषयों पर अपने बातों को तार्किक एवं प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। भाषण प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने आत्मविश्वास और प्रभावशाली वक्ता होने के सबूत पेश किये।

हाई स्कूल वर्ग की कहानी प्रतियोगिता में अंश कर्महे ने प्रथम, इशिका भारद्वाज ने द्वितीय तथा कृतिका जायसवाल ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। श्रेया शारदे, अलीशा महतो एवं अयान बर्मन को सांत्वना पुरस्कार प्रदान किए गए।

मिडिल स्कूल निबंध प्रतियोगिता में प्रिनीत कुमार पांडे प्रथम, कुमकुम गुप्ता द्वितीय तथा कोमल यादव तृतीय रहे।

मिडिल स्कूल भाषण प्रतियोगिता में प्रिनीत कुमार पांडे, राएशा दास एवं राधिका ने क्रमशः प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त किया।

हाई स्कूल भाषण प्रतियोगिता में सृष्टि उपाध्याय प्रथम, सृष्टि राव द्वितीय तथा वैष्णवी बघेल तृतीय स्थान पर रहीं।

सभी विजेताओं को पुरस्कृत करना दरअसल प्रोत्साहित करना ही रहा। साथ ही, आयोजन में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि पुरस्कार से बड़ी उपलब्धि है अपनी प्रतिभा को पहचानना और निरंतर सीखते हुए आगे बढ़ना।

कार्यक्रम के दौरान यह विचार प्रमुखता से सामने आया कि वर्तमान समय में जब विद्यार्थी विभिन्न डिजिटल माध्यमों से तेज़ी से जुड़ रहे हैं, ऐसे समय में उन्हें पुस्तकों, साहित्य और रचनात्मक लेखन से जोड़ना अत्यंत आवश्यक है। साहित्य विद्यार्थियों को केवल भाषा का ज्ञान नहीं देता, बल्कि उन्हें समाज, संस्कृति, संवेदना और मानवीय मूल्यों को समझने की दृष्टि भी प्रदान करता है।

कार्यक्रम के अंत में यह बात भी माइक से गूंजी कि साहित्य समाज की आत्मा है और प्रेमचंद की साहित्यिक परंपरा को आगे बढ़ाने का दायित्व आज की युवा पीढ़ी के कंधों पर है।

यह आयोजन इस विश्वास के साथ संपन्न हुआ कि शब्दों से संस्कार जन्म लेते हैं, साहित्य से संवेदना और संवेदना से एक बेहतर समाज बनता है। प्रेमचंद की साहित्यिक विरासत को नयी पीढ़ी तक पहुँचाने का यह प्रयास निश्चित ही आने वाले समय में अनेक नयी साहित्यिक प्रतिभाओं को जन्म देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगा।

-प्रेस विज्ञप्ति

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