सिनेमा में व्यंग्य: भारतीय संदर्भ में अध्ययन

पाक्षिक ब्लॉग अरुण अर्णव खरे की कलम से…. सिनेमा में व्यंग्य: भारतीय संदर्भ में अध्ययन        दृश्य-श्रव्य माध्यमों, विशेषतः सिनेमा और टेलीविज़न, में व्यंग्य की भूमिका पर...

विश्व-सिनेमा की पहली महिला फिल्मकार

पाक्षिक ब्लॉग चारु शर्मा की कलम से…. विश्व-सिनेमा की पहली महिला फिल्मकार           नमस्कार साथियो, उम्मीद है आपको विश्व सिनेमा के इतिहास की यह सीरीज़...

फिल्म नहीं केस स्टडी है ‘कोई मिल गया’

21वीं सदी के 25 वर्षों में से वो 25 भारतीय फ़िल्में, जो टर्निंग पॉइंट साबित हुईं। एक युवा फ़िल्मकार की दृष्टि से चयन और इन फ़िल्मों का दस्तावेज़ीकरण …...

जब सिनेमा बेकरार था कि सत्यजीत रे आएं…

गूंज बाक़ी… सत्यजीत रे (02.05.1921-23.04.1992) की याद के दिन एक महत्वपूर्ण दस्तावेज़। 1980 में नैशनल बुक ट्रस्ट से छपी किताब ‘सत्यजीत राय का सिनेमा’, लेखक चिदानंद दास गुप्ता और...

क्यों प्रासंगिक बनी हुई है ‘हज़ारों ख़्वा​हिशें ऐसी’?

21वीं सदी के 25 वर्षों में से वो 25 भारतीय फ़िल्में, जो टर्निंग पॉइंट साबित हुईं। एक युवा फ़िल्मकार की दृष्टि से चयन और इन फ़िल्मों का दस्तावेज़ीकरण… पाक्षिक...

साहित्य की आत्मा और सिनेमा का पर्दा

विवेक रंजन श्रीवास्तव की कलम से…. साहित्य की आत्मा और सिनेमा का पर्दा              लेखकीय भावना के साथ न्याय या निर्देशक का व्यवसायिक रूपांतरण,...

क्रांति थी पहली कथा-फ़िल्म.. उसी की कहानी

पाक्षिक ब्लॉग चारु शर्मा की कलम से…. क्रांति थी पहली कथा-फ़िल्म.. उसी की कहानी               नमस्कार दोस्तो, हम फिर हाज़िर हैं पिछली कहानी...

कितनी फ़िल्मी है हमारी डिप्लोमैसी!

पाक्षिक ब्लॉग भवेश दिलशाद की कलम से…. कितनी फ़िल्मी है हमारी डिप्लोमैसी!              विदेश नीति, कूटनीतिक संबंधों में हम इस क़दर कमज़ोर हैं कि...
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