June 2, 2026 आब-ओ-हवा टिप्पणी भोपाल और डॉ. बशीर बद्र का जाना विवेक रंजन श्रीवास्तव की कलम से…. भोपाल और डॉ. बशीर बद्र का जाना भोपाल की इस ऐतिहासिक और साहित्यिक सरज़मीं की यह तासीर रही... Continue Reading
May 15, 2026 आब-ओ-हवा हम बोलेंगे FIR पे FIR, शायरी से इतनी दिक्कत क्यों? पाक्षिक ब्लॉग भवेश दिलशाद की कलम से…. FIR पे FIR, शायरी से इतनी दिक्कत क्यों? जहां साहित्यिक चेतना दम तोड़ देती है, वह... Continue Reading
February 28, 2026 आब-ओ-हवा हम बोलेंगे साहिर के नाम, औरतों के नाम पाक्षिक ब्लॉग भवेश दिलशाद की कलम से…. साहिर के नाम, औरतों के नाम ये किरदार ये बातें बताती हैं कि तुम लोग ... Continue Reading
December 15, 2025 आब-ओ-हवा उर्दू के शाहकार कुरान के बाद सबसे ज़्यादा छपने वाली किताब पाक्षिक ब्लॉग डॉ. आज़म की कलम से…. मुसद्दस हाली – अल्ताफ़ हुसैन “हाली” किताब “मुसद्दस हाली” पहली बार 1879 में पब्लिश हुई थी। इसमें... Continue Reading
December 15, 2025 आब-ओ-हवा गूंजती आवाज़ें जुड़ती कड़ी, सिमटता हिसार और अकबर इलाहाबादी पाक्षिक ब्लॉग सलीम सरमद की कलम से…. जुड़ती कड़ी, सिमटता हिसार और अकबर इलाहाबादी शेर का मा’नी वक़्त और हालात के साथ... Continue Reading
November 30, 2025 आब-ओ-हवा ग़ज़ल: लौ और धुआं लकदक बाज़ार में गुमसुम किरदार पाक्षिक ब्लॉग आशीष दशोत्तर की कलम से…. लकदक बाज़ार में गुमसुम किरदार फ़िक्रो-फ़न के ऐतबार से शाइरी ने नये मौज़ूआत को हर वक़्त... Continue Reading
November 30, 2025 आब-ओ-हवा गूंजती आवाज़ें जंगल की रात और तख़लीक़ पाक्षिक ब्लॉग सलीम सरमद (03.12.1982) की कलम से…. जंगल की रात और तख़लीक़ पचमढ़ी की सिम्त पिपरिया नगर के आख़िरी छोर पर चूहे के... Continue Reading
November 12, 2025 आब-ओ-हवा आलेख उर्दू शायरी में भारतीयता – भाग दो 9 नवंबर को विश्व उर्दू दिवस मनाया गया। यह लंबा लेख आब-ओ-हवा के पाठकों के लिए ख़ास तौर से। यह चर्चित लेख लेखक ने उपलब्ध करवाया है, जो 2009... Continue Reading
November 12, 2025 आब-ओ-हवा आलेख उर्दू शायरी में भारतीयता – भाग एक 9 नवंबर को विश्व उर्दू दिवस मनाया गया। यह लंबा लेख आब-ओ-हवा के पाठकों के लिए ख़ास तौर से। यह चर्चित लेख लेखक ने उपलब्ध करवाया है, जो 2009... Continue Reading
October 15, 2025 आब-ओ-हवा काव्य हिन्दी-उर्दू शायरी में ‘चराग़’ शम्अ, दीया और दीपक शब्द भी शायरी में बख़ूबी बरते जाते रहे हैं लेकिन हमने इस दीवाली के मौक़े पर चुना है लफ़्ज़ ‘चराग़’ या चिराग़। इस लफ़्ज़ को... Continue Reading