गूंज बाक़ी… डॉ. जाफ़र रज़ा संपादित किताब ‘बज़्मे ज़िंदगी:रंगे शायरी’ की भूमिका फ़िराक़ गोरखपुरी (28.08.1896-03.03.1982) ने 12 अक्टूबर 1970 को ‘मैं और मेरी शायरी’ शीर्षक से लिखी थी। भाषा...
गूंज बाक़ी… ‘कवि मिट जाता लेकिन उसका उच्छ्वास अमर हो जाता है’, इस विचार पर केंद्रित हमारी इस शृंखला में इस बार बहुचर्चित, नयी ग़ज़ल के अग्रणी शायर के...
पाक्षिक ब्लॉग ज्ञानप्रकाश पांडेय की कलम से…. हिंदी ग़ज़ल में भूमिकाबाज़ी और डीएम मिश्र हिंदी ग़ज़ल के कुश्तीबाज़ ग़ज़लकारों में डी.एम. मिश्रा साहब का...