क्या धर्म को लेकर पक्षपाती है एआई?

पाक्षिक ब्लॉग ए. जयजीत की कलम से…. क्या धर्म को लेकर पक्षपाती है एआई?               कथावाचक, गुरु, मौलवी, पादरी अथवा धार्मिक विद्वान धर्मग्रंथों...

जो है मेरा है, अपने समय का सच है

मेरे हिस्से का क़िस्सा… आब-ओ-हवा पर एक विशेष शृंखला। उम्र और सृजन का बेहतरीन सफ़र कर चुके हस्ताक्षरों की कहानी, उन्हीं की ज़ुबानी। इस सिलसिले की शुरूआत भोपाल के...

संगीत का चित्रकला में रूपांतरण-1

नियमित ब्लॉग ब्रजेन्द्र शरण श्रीवास्तव की कलम से…. संगीत का चित्रकला में रूपांतरण-1             संगीत का चित्रकला में रूपांतरण: कैसे और कितना सम्भव? बैजू...

‘लड़ते हुए लोग’ श्रमिक संघर्ष की कहानियाँ

पाक्षिक ब्लॉग नमिता सिंह की कलम से…. ‘लड़ते हुए लोग’ श्रमिक संघर्ष की कहानियाँ।         संघर्षरत औद्योगिक श्रमिकों पर केंद्रित कहानी-संग्रह ‘लड़ते हुए लोग’ की कहानियों...

‘ज़हरीले खाने’ का डर, क्या है पूरा सच?

यह लेख दिखाता है कैसे चयनात्मक घटनाएँ, भावनात्मक भाषा, दोहराये गये नैरेटिव और समन्वित ऑनलाइन प्रवर्धन” (coordinated online amplification) मिलकर जनता का भरोसा पारंपरिक खाद्य व्यवस्था से कमज़ोर कर...

ईरानी सिनेमा में प्रतिरोध और मानवतावाद

प्रासंगिकता के चलते आब-ओ-हवा पर प्रस्तुति के लिए ‘हम देखेंगे’ पत्र से विशेष रूप से प्राप्त, ईरानी सिनेमा पर यह चर्चा सुधन्वा देशपांडे की कलम से निकली है, जिसका...

दुर्लभ भारतीय फिल्म क्यों है ‘आँखों देखी’?

21वीं सदी के 25 वर्षों में से वो 25 भारतीय फ़िल्में, जो टर्निंग पॉइंट साबित हुईं। एक युवा फ़िल्मकार की दृष्टि से चयन और इन फ़िल्मों का दस्तावेज़ीकरण… पाक्षिक...

चार्ली चैपलिन: परदे के पीछे की पूरी कहानी

पाक्षिक ब्लॉग चारु शर्मा की कलम से…. चार्ली चैपलिन: परदे के पीछे की पूरी कहानी नमस्कार साथियो, कैसे हैं आप सब? दोस्तो, सिनेमा – विश्वकथा की शृंखला में हम...
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