किस बंकर में जाये परमाणु ख़तरे से डरी धरती?

6 अगस्त 1945 को हिरोशिमा और 9 अगस्त को नागासाकी पर परमाणु बम बरसाये जाने की बरसी औपचारिक चिंताओं में सिमटकर रह गयी। परमाणु अप्रसार को बढ़ावा देने वाले...

सिकंदर का देश-2

पाक्षिक ब्लॉग रति सक्सेना की कलम से….. सिकंदर का देश-2 आज के दिन हम लोग नाश्ते के बाद फिर नदी के किनारे चल दिये, आज पुनः मेसीडोनिया के कवियों...

साहित्य जनमत बनाने के सिवा करे भी क्या: असग़र वजाहत

“साथ, यक़ीं, वाबस्तगी, बिकने थे बेदाम/ आज़ादी जो रख दिया, बंटवारे का नाम”… 1947 में विभाजन की क़ीमत पर आज़ादी मिली। आज हम कितने आज़ाद हैं और कितने विभाजित?...

लेखन: दस्तावेज़ीकरण नहीं, जीवन प्रवाह

पाक्षिक ब्लॉग डॉ. संजीव जैन की कलम से…. लेखन: दस्तावेज़ीकरण नहीं, जीवन प्रवाह ध्वनि से अर्थ तक: लेखन की आंतरिक यात्रा का दसवां अध्याय… हमने जीवन को जीना कम...

“मणिपुर जल रहा है”

हिंसा पीड़ित मणिपुर का जाएज़ा लेने गयी थीं, भोपाल निवासी कवि और ‘समय के साखी’ की संपादक डॉ. आरती, उनकी डायरी एक पुस्तिका के रूप में हाल ही Notnul...

सीजेपी आन्दोलन और लोकतंत्र का कल

डॉ. वीरेन्द्र कुमार शेखर की कलम से…. सीजेपी आन्दोलन और लोकतंत्र का कल            कुछ घटनाएँ ऐसी होती हैं, जिनका वास्तविक महत्व उनके घटित होने...

व्यंग्य का दरोगा

व्यंग्य-कथा संजीव परसाई की कलम से…. व्यंग्य का दरोगा            दरोगा-राज में सब सुखी थे। लोग ले-देकर अपने काम आसानी से करवा लेते। देने वाले...
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