
- April 15, 2026
- आब-ओ-हवा
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पाक्षिक ब्लॉग ए. जयजीत की कलम से....
एआई की ‘ज़ुल्मी दुनिया’ में एंथ्रोपिक की ‘गांधीगीरी’!
फरवरी 2025 में कैलिफ़ोर्निया के शहर सांता क्लारा के एक होटल के कमरे में एंथ्रोपिक कंपनी के कुछ एक्सपर्ट एक लैपटॉप के चारों ओर जमा थे। यह टीम अपने नये एआई मॉडल ‘क्लॉड 3.7 सॉनेट’ की लॉन्चिंंग से पहले अंतिम सुरक्षा मानकों की जांच कर रही थी। अचानक वहां मौजूदा विशेषज्ञों के चेहरे तनाव से लाल हो गये। दरअसल, उनके नये एआई मॉडल के टेस्ट रिज़ल्ट बता रहे थे कि उनका यह सिस्टम ख़तरनाक जैविक हथियार बनाने में भी मदद कर सकता है। इस पर एंथ्रोपिक ने तुरंत अपने इस मॉडल की रिलीज़ रोक दी। दस दिन के बाद उसने इसे लॉन्च ज़रूर किया, मगर कुछ अधिक सेफ़्टी फ़ीचर्स और फ़िल्टर्स के साथ। साथ ही, उसने अपने ऑफ़िशियल पेज पर अपनी रिस्पॉन्सिबल स्केलिंग पॉलिसी भी घोषित की, ताकि अन्य एआई लैब्स/कंपनियां उसका मूल्यांकन कर अपनी नीतियों में उसका इस्तेमाल कर सकें।
यह एक असाधारण बात थी। एआई की गला-काट प्रतिस्पर्धा में एंथ्रोपिक चाहती तो चुप्पी साधे रह सकती थी, यहां तक कि वह पिछले दरवाज़ों से व्यावसायिक फ़ायदों की संभावनाएं भी तलाश सकती थी। आख़िर, दुनिया की बड़ी-बड़ी आर्म्स कंपनियां विध्वंसक हथियारों का निर्माण और बिक्री करके अरबों-खरबों के वारे-न्यारे कर ही रही हैं। लेकिन कंपनी ने इस घटना को दबाने के बजाय दुनिया के सामने यह स्वीकार किया कि एआई के मॉडल्स शक्तिशाली होने के साथ-साथ घातक भी हो सकते हैं। उसने इसके ज़रिये सरकारों और अन्य टेक कंपनियों को आगाह किया कि एआई के विकास का मतलब एक अंधी होड़ नहीं हो सकती।
कैसे सुर्खियों में आयी एंथ्रोपिक?
असल मामला, जिसने केवल पांच साल पुरानी एंथ्रोपिक कंपनी को सुर्खियों में ला दिया, तब आया जब 3 जनवरी 2026 की रात को अमेरिका की स्पेशल फ़ोर्सेस ने वेनेज़ुएला की सीमा के भीतर घुसकर एक गोपनीय ऑपरेशन को अंजाम दिया और कुछ ही घंटों में वहां के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को उठा लिया गया। वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक़ इस मिशन में एंथ्रोपिक के एआई मॉडल ‘क्लॉड’ का इस्तेमाल ‘स्ट्रैटेजिक एडवाइज़र’ के रूप में किया गया था। इससे एंथ्रोपिक ऐसी पहली एआई कंपनी बन गयी, जिसकी सेवाओं का उपयोग अमेरिका के ख़ुफ़िया अभियानों में किया गया। इसके लिए अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) ने एंथ्रोपिक को 20 करोड़ डॉलर का कॉन्ट्रैक्ट दिया था। चूंकि एंथ्रोपिक एक व्यावसायिक कंपनी है और इसलिए उसका इस तरह से आर्थिक सौदे में शामिल होना ग़लत भी नहीं था।

फिर टकराव कहां से शुरू हुआ?
वेनेज़ुएला में एंथ्रोपिक की मदद से जिस तरह रातो-रात एक असंभव-से मिशन को सफलता के साथ अंजाम दिया गया, वह इस बात का संकेत था कि भविष्य में एआई का किस हद तक उपयोग या दुरुपयोग किया जा सकता है। ट्रम्प प्रशासन, ख़ासकर पेंटागन के अधिकारी एंथ्रोपिक के एआई मॉडल्स की असीम संभावनाओं से पहले से ही परिचित थे। वेनेज़ुएला प्रकरण के बाद अमेरिकी सरकार ने एंथ्रोपिक पर अनैतिक दबाव डालना शुरू कर दिया कि कंपनी अपने सॉफ़्टवेयर की सारी पाबंदियां (फ़िल्टर्स, सेफ़ गार्ड्स वगै़रह) हटा दे, ताकि पेंटागन अपनी मनमर्ज़ी से इसका इस्तेमाल कर सके। मगर एंथ्रोपिक ने इससे इनकार कर दिया। उसने पेंटागन के साथ आगे की डील के लिए दो शर्तें रखीं। एक, एंथ्रोपिक किसी स्वायत्त या ऑटोनॉमस हथियार के संचालन के लिए अपनी एआई टेक्नोलॉजी ‘क्लॉड’ का उपयोग करने की अनुमति नहीं देगी। दूसरी, सरकार अमेरिकी नागरिकों की निजी जानकारी और डेटा खंगालने के लिए इसका इस्तेमाल नहीं करेगी।
इन शर्तों ने ट्रम्प प्रशासन को नाराज़ कर दिया। रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा कि ऐसे एआई मॉडल का उपयोग करने का कोई मतलब नहीं है, जो युद्ध लड़ने में मदद न कर सके। इससे पहले हेगसेथ ने ‘डिफ़ेंस प्रोडक्शन एक्ट’ (DPA) का इस्तेमाल करने की धमकी दी। यह क़ानून ख़ास तौर पर युद्ध या आपातकाल के समय लागू किया जाता है, जो सरकार को किसी भी निजी कंपनी को अपनी मर्ज़ी के अनुसार काम करने के लिए मजबूर करने की शक्ति देता है। यहां तक कि राष्ट्रपति ट्रम्प ने भी एंथ्रोपिक को धमकाना शुरू कर दिया। ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म ‘ट्रूथ सोशल’ पर कंपनी को धमकाते हुए लिखा कि वो सभी फ़ेडरल एजेंसियों को एंथ्रोपिक की एआई तकनीक का इस्तेमाल न करने को निर्देशित कर रहे हैं।
लेकिन एंथ्रोपिक के सीईओ डारियो अमोदेई ने भी दो टूक कहा कि पेंटागन और सरकारी एजेंसियों के साथ काम करने में उनकी भी कोई दिलचस्पी नहीं है। यह एआई उद्योग में एक ऐतिहासिक पल था, जहां एक कंपनी ने अरबों डॉलर के सरकारी कॉन्ट्रैक्ट को किनारे कर ताक़तवर रक्षा मंत्रालय की धमकियों के सामने झुकने से इसलिए मना कर दिया, क्योंकि वह अपने एआई टूल्स को अनैतिक युद्ध का औज़ार नहीं बनने देना चाहती थी।
कैसे हुई ओपनएआई की एंट्री?
एंथ्रोपिक के इस डील से हटने को ओपनएआई ने अपने लिए अवसर के रूप में लिया। 28 फरवरी को अपनी वेबसाइट पर घोषणा की कि उसने अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के साथ सौदा कर लिया है। कंपनी के सीईओ सैम आल्टमैन ने उन ख़बरों का ‘खंडन’ किया कि उन्होंने रक्षा मंत्रालय की उन्हीं शर्तों को स्वीकार कर लिया, जिन्हें एंथ्रोपिक ने ठुकरा दिया था। ओपनएआई ने एक विज्ञप्ति जारी कर दावा किया कि उसकी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल न तो अमेरिकी नागरिकों की सामूहिक निगरानी में किया जाएगा और न ही स्वायत्त हथियारों के संचालन में।
बक़ौल ओपनएआई, वह अमेरिकी रक्षा मंत्रालय की जनवरी 2023 की गाइडलाइन के अनुसार काम करेगी, जिसमें एआई संचालित स्वायत्त हथियारों के इस्तेमाल पर रोक लगायी गयी है। लेकिन इसके उलट एंथ्रोपिक का इस गाइडलाइन पर ही भरोसा नहीं था, क्योंकि उसके मुताबिक़ यह एआई संचालित स्वायत्त हथियारों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध नहीं लगाती है, बल्कि सिर्फ़ इतना कहती है कि ‘सिद्धांतत: एआई संचालित स्वायत्त हथियारों का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।’ इसका मतलब यह है कि अगर अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने एआई संचालित स्वायत्त हथियारों का इस्तेमाल करने का फ़ैसला किया, तो फिर ओपनएआई को भी इससे गुरेज़ नहीं रहेगा।
एआई संचालित ‘किलर रोबोट्स’ चिंता की वजह क्यों?
एआई संचालित स्वायत्त हथियारों को अक्सर ‘किलर रोबोट्स’ कहा जाता है। ये ऐसे हथियार या मशीनें होती हैं, जो एक बार एक्टिवेट होने के बाद ख़ुद ही अपना लक्ष्य चुनती हैं और उसे ख़त्म करने का फ़ैसला लेती हैं। सामान्य हथियारों और इनमें सबसे बड़ा अंतर यह है कि जहां पारंपरिक हथियार में ट्रिगर का नियंत्रण विशेषज्ञ इंसानों के पास रहता है, वहीं स्वायत्त हथियार में मशीन का एल्गोरिदम ख़ुद तय करता है कि सामने वाला व्यक्ति ‘दुश्मन’ है या ‘आम नागरिक’ और फिर बिना किसी इंसानी मंज़ूरी के उसे ख़त्म कर सकता है।
एंथ्रोपिक के सीईओ डारियो अमोदेई का तर्क है कि किसी की जान लेने का अंतिम फ़ैसला हमेशा एक इंसान का होना चाहिए, मशीन का नहीं। क्योंकि उनके अनुसार, अंतत: इंसान की जान की क़ीमत एक इंसान ही बेहतर समझ सकता है, मशीन नहीं। इसी तरह, यदि दो देश एआई संचालित स्वायत्त हथियारों से आपस में लड़ने लगें, तो युद्ध इतना बे-लगाम हो सकता है कि कोई इंसान फिर उसे चाहकर भी नहीं रोक नहीं पाएगा। यह कुछ ही घंटों में पूरी दुनिया में तबाही मचा सकता है।
क्या यह एंथ्रोपिक की ब्रांडिंग की नीति है?
पूरी कहानी का यह एक दूसरा पहलू है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि एंथ्रोपिक का यह रवैया उसकी अपनी ब्रांडिंग का हिस्सा है। वह गूगल और ओपनएआई के ‘कॉर्पोरेट’ एआई के मुक़ाबले स्वयं को एक ‘सुरक्षित और मानवीय’ विकल्प के रूप में पेश करना चाहती है। जैसा कि पेंटागन के एक पूर्व अधिकारी ने बीबीसी से कहा, ‘यह एंथ्रोपिक के लिए शानदार पब्लिसिटी है। उसकी लोकप्रियता बढ़ रही है और इसी के अनुपात में कंपनी के शेयरों का मूल्यांकन भी।’
यहां कंपनी की नैतिकता पर सवाल बिल्कुल उठते हैं। लेकिन एआई की इस ‘ज़ुल्मी दुनिया’ में जहां हर कोई पूरी तरह सत्ता के साथ खड़ा नज़र आना चाहता है, एंथ्रोपिक का सरकार की धमकियों के बावजूद अपने रुख़ पर अडिग रहना उसे अन्य कंपनियों से अलग और अपेक्षाकृत ज़्यादा नैतिक तो बनाता ही है।
बेशक, एंथ्रोपिक की नैतिकता बेदाग़ नहीं है, लेकिन इस अंधी दौड़ में वह ऐसा इकलौता खिलाड़ी है, जिसने कम से कम एक ‘ब्रेक’ लगाने की हिम्मत दिखायी है। इससे पहले वेब कोडिंग को लेकर भी जहां आल्टमैन ने कोडर की नौकरियों के ख़ात्मे की बात कही थी, वहीं एंथ्रोपिक के को-फ़ाउंडर जैरेड कपलान ने कोडिंग के तरीक़ों में बदलाव की बात करके कोडर्स के लिए संभावनाएं जीवित रखी हैं।

ए. जयजीत
27 वर्षों से हिंदी पत्रकारिता में सक्रिय हैं। प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल तीनों माध्यमों में और रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क पर कार्य करने का लंबा अनुभव। ये अपने आप को व्यंग्यकार भी मानते हैं। प्रमाण-स्वरूप 'पाँचवाँ स्तंभ' नाम से व्यंग्य संग्रह भी प्रकाशित करवा चुके हैं। अनुवाद इनकी वर्क प्रोफ़ाइल का हिस्सा होने के साथ-साथ शौक़ भी रहा। स्टीव जॉब्स की ऑफ़िशियल बायोग्राफी ‘स्टीव जॉब्स’ (वॉल्टर आइज़ैक्सन) के हिंदी अनुवाद का श्रेय इन्हीं को है। कुछ और पुस्तकों का अनुवाद भी कर चुके हैं।
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