
‘अरमुग़ान-ए-परवेज़’ और ‘उर्दू इन हिंदुस्तान’ लोकार्पित
दिल्ली। उर्दू डेवेलपमेंट आर्गनाइज़ेशन, दिल्ली शाखा के तत्वावधान में फ़िरोज़ मुज़फ़्फ़र की दो किताबों ‘अरमुग़ान-ए-परवेज़’ और ‘उर्दू इन हिंदुस्तान’ का लोकार्पण किया गया। पहली किताब का इजरा डॉ. सईद अहमद ख़ां के हाथों हुआ और दूसरी यानी अंग्रेज़ी पुस्तक ‘उर्दू इन हिन्दुस्तान’ का लोकार्पण सामाजिक कार्यकर्ता एवं धार्मिक विद्वान शेख़ अलीमुद्दीन असदी ने किया।
यूडीओ ने यह आयोजन ख़याला डीडीए फ़्लैट की मदीना मस्जिद के पास एक मदरसे में आयोजित किया था। इस अवसर पर पत्रकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता वसीम सिद्दीक़ी ने फ़िरोज़ मुज़फ़्फ़र के साहित्यिक एवं सामाजिक कार्यों की जानकारी देते हुए उन्हें बधाई दी। इस अवसर कई पत्रकारों एवं साहित्यकारों की उपस्थिति ने इस अवसर को यादगार बना दिया।

संस्था के अध्यक्ष डॉ. सईद अहमद ख़ां ने फ़िरोज़ मुज़फ़्फ़र को दिल्ली प्रांत का महासचिव भी नियुक्त करने के साथ उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उम्मीद जताई कि वह संस्था को मज़बूती दे सकेंगे। असदी ने बधाई देते हुए कहा कि उर्दू के विकास के लिए दिल्ली सरकार को चाहिए कि वह दिल्ली उर्दू अकादमी का गठन करे और फ़िरोज़ मुज़फ़्फ़र की मेहनत और योगदान के अनुरूप उसकी बागडोर उन्हें सौंपी जाये।
एक नज़र में ‘अरमुग़ान-ए-परवेज़’
यह फ़िरोज़ मुज़फ़्फ़र द्वारा संपादित इक्कीसवीं पुस्तक है जो परवेज़ मुज़फ़्फ़र की साहित्यिक सेवाओं संबंधी लेखों पर आधारित है। प्रसिद्ध उर्दू साहित्यकार मुज़फ़्फ़र हनफ़ी के सुपुत्र परवेज़ बर्मिंघम, यूके मे रहकर हिन्दी उर्दू की सेवाएं कर कर रहे हैं। वहां परवेज़ गीतांजलि मल्टीलेंग्वेज एसोसिएशन के सचिव भी हैं। इसी साल मई में उम्र के साठ और साहित्य सृजन में चालीस साल पूरे करने वाले परवेज़ को एक तरह से यह पुस्तक बड़े भाई की तरफ़ से तोहफ़ा ही है।
इस किताब में परवेज़ की शायरी पर प्रो. फ़रमान फ़तेहपुरी, प्रो. सेहर अंसारी, प्रो. मुज़फ़्फ़र हनफ़ी, मुनववर राना, इफ्तेख़ार ईमाम सिद्दीक़ी, डॉ. शमा अफ़रोज़ ज़ैदी, डॉ. अफ़ज़ल आक़िल, प्रो. मेहमूद काज़मी और प्रो. फ़ेसर शेख अकील अहमद के लेखों के अलावा कई अन्य लेख भी शामिल हैं। कुछ यादगार तस्वीरें भी किताब में संजोयी गयी हैं।
एक नज़र में ‘हिंदुस्तान इन उर्दू’
यह मुज़फ़्फ़र हनफ़ी की बहुत प्रसिद्ध पुस्तक रही है जो 2007 में उर्दू मे प्रकाशित हुई थी। भारत की एकता, अखंडता और सामाजिक ताने-बाने पर आधारित विभिन्न लेखों का यह संकलन इसके लेखक के 2021 में देहांत के बाद 2023 में हिंदी यानी देवनागरी लिपि में भी आया। किताब में शामिल कुछ लेखों के शीर्षक हैं:
- राम की अज़मत उर्दू शायरी में
- होली और उर्दू शायरी
- रामायण उर्दू में
- हिन्दुस्तानी ग़ज़ल भारतीय परिवेश में
- जमहूरी मुआशरा और उर्दू शायरी
- चकबस्त की शायरी
- फ़िरक़ापरस्ती की लआनत और उर्दू
- क़ौमी यकजहती और उर्दू अदब
फ़िरोज़ मुज़फ़्फ़र ने इस पुस्तक का हिंदी लिप्यंतरण और संपादन करने के बाद अब इसे अंग्रेज़ी में प्रस्तुत किया है। इस पुस्तक के कुछ लेखों का अंग्रेज़ी अनुवाद अकोला के कवि फ़राज़ आरिफ़ जी ने किया है। ग़ौरतलब है कि इस पुस्तक की सराहना वरिष्ठ हिन्दी आलोचक आलोक पुराणिक कर चुके हैं।
दोनों ही किताबें फ़िरोज़ मुज़फ़्फ़र से संपर्क कर प्राप्त की जा सकती हैं। उनका मोबाइल नंबर 9310365373 है।
-प्रेस विज्ञप्ति

धन्यवाद