
यथाकथा के एडिशन-5 का मुंबई में समापन, सिनेमा और साहित्य के नाम रहे चार दिनों के बाद आगे की योजना भी…
अपनी कहानी बनाएं और ऐसे मंचों पर रखें: देशपांडे
मुंबई। “ऐसे फ़ेस्टिवल में हमें बहुत से ऐसे लोगों से मिलने का मौक़ा मिलता है, जिनसे हम आम तौर पर नहीं मिल पाते। जैसे मैं आज यहाँ राहुल जी से मिला और उनको सुना। यथाकथा एक मंच है, जहाँ आप अपनी कहानी प्रस्तुत कर सकते हैं। यहाँ मौजूद नौजवान बच्चों से मैं कहना चाहता हूँ अपनी कहानी बनाइए और ऐसे मंच हैं, जहाँ आप उनको रख सकते हैं।” यह बात वरिष्ठ अभिनेता और रंग कलाकार मकरंद देशपांडे ने यथाकथा फ़िल्म एंड लिटरेचर फ़ेस्टिवल के पाँचवाँ संस्करण में कही। 28 सितंबर से 1 अक्टूबर 2026 के बीच मुंबई में यह उत्सव आयोजित किया गया। ‘वॉइसेज़ आफ़ ए चेंजिंग इंडिया’ की थीम के साथ ये चार दिन सिनेमा, साहित्य, कविता, प्रस्तुतियों, कार्यशालाओं, मास्टरक्लास और सार्थक संवादों के नाम रहे।
यथाकथा के लिए पाँचवाँ संस्करण एक महत्वपूर्ण पड़ाव रहा है। वर्षों के सफ़र में यह महोत्सव एक ऐसे मंच के रूप में विकसित हुआ है, जहाँ सिनेमा और साहित्य पारंपरिक सीमाओं से परे एक-दूसरे से संवाद करते हैं।
महोत्सव की प्रमुख विशेषताओं में राहुल रवैल, मकरंद देशपांडे, अदिति पोहनकर, महेश ठाकुर, जयति भाटिया, अनंगशा बिस्वास, योगेंद्र विक्रम सिंह और सावन टैंक सहित सिनेमा और मनोरंजन जगत की जानी-मानी हस्तियों के साथ संवाद शामिल रहे। इसके अलावा डॉ. पीयूष रॉय, अनुराग मिश्रा, निवेदिता पोहनकर, मानवेंद्र सिंह सहित कई फ़िल्मकारों और इंडस्ट्री से जुड़े विशेषज्ञों ने भी विभिन्न सत्रों में भाग लिया।

ब्राज़ील की फ़िल्मकार और कलाकार क्लारा क्लैरिस की विशेष अंतरराष्ट्रीय उपस्थिति ने महोत्सव को एक वैश्विक आयाम दिया। वह ब्राज़ील के संस्कृति मंत्रालय की ओर से महोत्सव में शामिल हुईं और सांस्कृतिक आदान-प्रदान पर केंद्रित व्यापक संवाद में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
कुछ सत्र रहे ख़ास
महोत्सव के दौरान लेखक निखलेश माथुर की फ़िक्शन थ्रिलर ‘द लास्ट बारगेन’ का भी विशेष लॉन्च किया गया। पुस्तक का विमोचन प्रसिद्ध फ़िल्मकार राहुल रवैल, अभिनेता-फिल्मकार मकरंद देशपांडे और ब्राज़ील की फ़िल्मकार एवं कलाकार क्लारा क्लैरिस की उपस्थिति में हुआ।
पुस्तक लॉन्च पर अपने अनुभव साझा करते हुए निखलेश माथुर ने कहा, “मैं अब भी इस बात से बेहद प्रभावित हूँ कि महोत्सव की टीम ने किताब के आधिकारिक लॉन्च को कितनी ख़ूबसूरती से आयोजित किया। जिस तरह से पूरा कार्यक्रम शुरू से अंत तक सहज और व्यवस्थित रहा, वह मेरे लिए बेहद ख़ास अनुभव था। सबसे ज़्यादा मुझे दर्शकों की विविधता ने प्रभावित किया, विशेष रूप से छात्रों ने जिस गहरी रुचि के साथ पूरे कार्यक्रम को सुना और उसमें जुड़े रहे। एक लेखक के रूप में यह मेरे लिए बेहद अनूठा अनुभव था।”
महोत्सव के SWA Writers’ Room सत्र में स्क्रीन के लिए लेखन की कला और समकालीन कहानी कहने की सहयोगात्मक प्रक्रिया पर चर्चा की गई। इस सत्र में विचार किया गया कि किस प्रकार विचारों और साहित्यिक संवेदनाओं को सिनेमा तथा ओटीटी के लिए कथाओं में रूपांतरित किया जाता है।
एक अन्य महत्वपूर्ण सत्र ‘मराठी चित्रपट महामंडल’ के साथ “Literature and Films – A Unique Bond” शीर्षक से था। इस सत्र में मराठी साहित्य और सिनेमा के बीच लंबे समय से चले आ रहे संबंध तथा साहित्यिक कृतियों, लेखकों और फ़िल्मकारों के एक-दूसरे पर पड़ने वाले प्रभावों पर चर्चा हुई। सत्र ने साहित्य और सिनेमा के बीच रूपांतरण, कहानी कहने और रचनात्मक संवाद के विभिन्न पहलुओं को सामने रखा।
लोग साथ आते गये, कारवां…
महोत्सव के साहित्यिक कार्यक्रमों में महत्वपूर्ण योगदान के लिए साहित्यिक क्यूरेटर किरण भाट के प्रति विशेष आभार व्यक्त किया गया, जिन्होंने विभिन्न साहित्यिक संवादों और रचनात्मक आवाज़ों को एक मंच पर लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी।
यह महोत्सव SVKM उषा प्रवीण गांधी कॉलेज के सहयोग से आयोजित किया गया, जबकि Krokio Products इसके मुख्य सहयोगी रहे। महोत्सव को यूनियन बैंक मुंबई, एनटीपीसी औरैया, आरवी यूनिवर्सिटी बेंगलुरु, लक्ष्य ट्रस्ट गुजरात, एरिना एनिमेशन, पोएट्री सर्कल 2.0, पेपरवॉल पब्लिशिंग, ग्लोबल हिंदी फ़ाउंडेशन सिंगापुर, आसिफ़ा इंडिया, कैपिटल वर्ल्ड कंसल्टेंसी पुणे, फ़र्स्ट फ़ॉरे लिटरेरी एजेंसी, इयॉन फ़िल्म्स, फ़िल्म एंड टीवी वर्ल्ड, आब-ओ-हवा, भोपाल सहित कई अन्य संस्थाओं और सहयोगियों का समर्थन प्राप्त हुआ।
यूपीजी कॉलेज की टीम और प्रबंधन की ओर से श्री आशीष मेहता ने यथाकथा के साथ इस सहयोग के लिए हार्दिक आभार व्यक्त किया। उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर ज़ोर दिया कि इस महोत्सव ने छात्रों को फ़िल्म और रचनात्मक उद्योग से जुड़े अनुभवी कलाकारों तथा पेशेवरों के साथ सीधे संवाद करने और वास्तविक इंडस्ट्री एक्सपोज़र प्राप्त करने का अवसर दिया। उन्होंने कहा कि इस तरह का अनुभव छात्रों में आत्मविश्वास बढ़ाने, उनकी सोच को व्यापक बनाने और रचनात्मक क्षेत्र में करियर की संभावनाओं तथा उसकी वास्तविकताओं को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
आगे की दिशा: सफ़र जारी
यथाकथा की संस्थापक चारु शर्मा ने कहा, “पाँचवें संस्करण का समापन एक भावुक क्षण है, लेकिन मैं इसे अंत से कहीं अधिक एक नये अध्याय की शुरूआत के रूप में देखती हूँ। जब हमने यथाकथा की शुरूआत की थी, तब हमारा उद्देश्य एक ऐसा मंच बनाना था जहाँ सिनेमा, साहित्य और समाज एक साथ आ सकें — और आज उस विचार को बढ़ते हुए देखना मेरे लिए बेहद संतोष और खुशी की बात है।

इस वर्ष मुझे सबसे अधिक जिस बात ने छुआ, वह था छात्रों और युवा दर्शकों का फ़िल्मकारों, लेखकों और कलाकारों के साथ इतने खुले मन से जुड़ना। अगर यथाकथा किसी एक युवा को अपनी आवाज़ खोजने या रचनात्मक दुनिया में अपने भविष्य की कल्पना करने का आत्मविश्वास दे सके, तो हमारे लिए यही इस प्रयास का सबसे बड़ा अर्थ है।”
यथाकथा के लिए पाँचवें संस्करण का समापन किसी अंत का संकेत नहीं, बल्कि अगले अध्याय की शुरुआत है। महोत्सव अपने पाँचवें संस्करण से मिली ऊर्जा और अनुभव को आगे बढ़ाते हुए स्वतंत्र सिनेमा, साहित्य, युवा फ़िल्मकारों, उभरते कलाकारों और कहानी कहने के नये माध्यमों के साथ अपने जुड़ाव को और व्यापक बनाने की दिशा में काम करेगा।
आने वाले समय में यथाकथा का उद्देश्य उभरते फ़िल्मकारों और लेखकों के लिए अधिक अवसर पैदा करना, ज्ञान एवं कौशल आधारित कार्यक्रमों का विस्तार करना तथा सिनेमा और साहित्य के बीच संवाद को और मज़बूत करना है। यानी कहानी जारी है — और अगला अध्याय अब शुरू होता है।
