हिंदी ग़ज़ल के गिरोह की भावना

नियमित ब्लॉग ज्ञानप्रकाश पांडेय की कलम से…. हिंदी ग़ज़ल के गिरोह की भावना             डॉ. भावना की हैसियत बिहार में परवीन शाकिर से कहीं...

जंग-ए-आज़ादी, आज़ादी और उर्दू शायरी

इस बार इस कॉलम में कुछ ऐसी रचनाएं, जो न सिर्फ़ आज़ादी की बात करती हैं बल्कि तक़्सीम-ए-हिंद (भारत विभाजन) पर सवाल भी खड़ा करती हैं; आज़ादी के मतवालों...

प्रधानमंत्री के ‘मन की बात’ के मन में

स्वास्थ्य से जुड़ी हमारी धारणाओं, प्रैक्टिसों, नीतियों और अप्रोच आदि को लेकर यह ब्लॉग लगातार चिंतन प्रस्तुत कर रहा है। ‘आज़ादी का ऑडिट’ अंक में देश की स्वास्थ्य नीतियों...

सिनेमा को ‘वैचारिक’ बनाने वाला पहला फ़िल्मकार

पहले विश्वयुद्ध के बीच रूस की क्रांति ने एक फ़िल्मकार को उभारा, जिसने पहली बार सिनेमा को वैचारिकी का माध्यम बनाने का सफ़र शुरू किया। इस सफ़र में वह...

‘मुल्क’ से बदलते सिनेमा का अनुभव

सिनेमा जगत में एक ख़ास तरह की फ़िल्मों के लिए पूरी आज़ादी का माहौल है तो दूसरी ख़ास तरह की फ़िल्मों के लिए पूरी पाबंदी का। इस बीच एक...

रंग-बिरंगी: नामचीन साहित्यकारों की चुटकियाँ-9

नियमित ब्लॉग विवेक मेहता की प्रस्तुति…. रंग-बिरंगी: नामचीन साहित्यकारों की चुटकियाँ-9               हिंदी साहित्य जगत के स्वनामधन्य लेखकों/कलमकारों के बीच के चुटकुलों/कटाक्ष/हास्य लहरियों...

ओडिसी: इस वक़्त महाकाव्य का पुनर्पाठ?

नियमित कॉलम भवेश दिलशाद की कलम से…. ओडिसी: इस वक़्त महाकाव्य का पुनर्पाठ?              महाकाव्यों का सबसे बड़ा विरसा होता है कि ये देश...
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