क्यों पढ़ना चाहिए ‘डेथ इन वेनिस’?

मासिक ब्लॉग निशांत कौशिक की कलम से…. क्यों पढ़ना चाहिए ‘डेथ इन वेनिस’? मैंने लगभग चार महीने पहले थॉमस मान कृत ‘द मैजिक माउंटेन’ पढ़ा था। वह लंबी अवधि...

हिंदी पत्रकारिता का भारत-बोध

ख़बरनामा:200… इस साप्ताहिक शृंखला के लेख हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्षों के इतिहास की प्रवृत्तियों, सीमाओं, उपलब्धियों और अंतर्विरोधों को समझने का प्रयास हैं। इन लेखों को इन्हें लिखने...

शहीद के मान के लिए सैकड़ों धरने पर, प्रशासन मौन

प्रयागराज में एसआरएन अस्पताल के नामकरण को लेकर आंदोलन नौवें दिन भी जारी, क्या भुला दी जाएगी शहीद रोशन सिंह की कीर्तिगाथा? शहीद के लिए सैकड़ों ने किया प्रदर्शन,...

शशि खरे की कहानी: विकास

एक अच्छी कहानी कई परतों पर एक साथ चल रही होती है। दिशा, निष्कर्ष, अंत.. पहले से कहानी में कुछ तय नहीं होता, बस प्रवाह​ निश्चित होता है। इन...

टूटती मूर्तियाँ.. समाज का वैचारिक दर्पण

विवेक रंजन श्रीवास्तव की कलम से…. टूटती मूर्तियाँ.. समाज का वैचारिक दर्पण            इतिहास का एक विचित्र दृश्य बार-बार सामने आता है। जब किसी समाज...

इंद्रधनुष-10 : शकील जमाली

इंद्रधनुष-10: शकील जमाली ग़ज़ल ने पिछली कुछ दहाइयों से जो नया लहजा, नया रंग इख़्तियार किया है, जिसे विद्वान जदीद शाइरी भी कहते हैं, उसने अपना एक ख़ानदान बना...

कथाकार प्रज्ञा और सविता पाठक सम्मानित

शिव कुमार शिव स्मृति सम्मान और शिव कुमार शिव की ‘प्रतिनिधि कहानियां’ का लोकार्पण कथाकार प्रज्ञा और सविता पाठक सम्मानित             समकालीन चर्चित कथाकार...

मुंशी प्रेमचन्द के नाम में ‘मुंशी’ कहां से आया?

विवेक रंजन श्रीवास्तव की कलम से…. मुंशी प्रेमचन्द के नाम में ‘मुंशी’ कहां से आया?              इस साहित्यिक जिज्ञासा का इतिहास रोचक है। प्रश्न...

प्रेमचंद, सज्जाद ज़हीर और प्रगतिशील आंदोलन

31 जुलाई प्रेमचंद जयंती पर ज़ाहिद ख़ान की कलम से…. प्रेमचंद, सज्जाद ज़हीर और प्रगतिशील आंदोलन             तरक़्क़ी-पसंद अदीबों का पहला ग्रुप साल 1935...
error: Content is protected !!