चुनाव है, खड़े होने का नहीं बैठने का मज़ा

हास्य-व्यंग्य डॉ. मुकेश असीमित की कलम से…. चुनाव है, खड़े होने का नहीं बैठने का मज़ा              आप कहेंगे, चुनाव तो खड़े होने के...

जब सिनेमा बेकरार था कि सत्यजीत रे आएं…

गूंज बाक़ी… सत्यजीत रे (02.05.1921-23.04.1992) की याद के दिन एक महत्वपूर्ण दस्तावेज़। 1980 में नैशनल बुक ट्रस्ट से छपी किताब ‘सत्यजीत राय का सिनेमा’, लेखक चिदानंद दास गुप्ता और...

इंद्रधनुष-9 : नोमान शौक़

इंद्रधनुष-9 : नोमान शौक़ “मेरे नज़दीक इस मुश्किल वक़्त में शायरी करना क़ब्रिस्तान में वायलिन बजाने जैसा है।” यह कहना रहा है हमारे समय के मक़बूल शायर नोमान शौक़...

हमारी पृथ्वी को कौन-से उपाय बचाएंगे?

पृथ्वी दिवस पर विवेक रंजन श्रीवास्तव की कलम से…. हमारी पृथ्वी को कौन-से उपाय बचाएंगे?            धरती हमारी चेतना का व्यापक विस्तार है और इसी...

दादी या माताजी: लोकगीतों में रचा जीवन

संस्मरण ब्रज श्रीवास्तव की कलम से…. दादी या माताजी: लोकगीतों में रचा जीवन खीर-पूड़ी खाने के लिए आये कौए छत पर श्राद्ध संपादन के लिए ब्राह्मण अतिथियों की स्मृति...
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