क़िस्सा डॉ. शिवमंंगल सिंह सुमन की क़ैद का

संस्मरण रामप्रकाश त्रिपाठी की कलम से…. क़िस्सा डॉ. शिवमंंगल सिंह सुमन की क़ैद का            जिसका ज़िक्र इस इस फ़साने में है, वह शहर ग्वालियर...

साहित्य जनमत बनाने के सिवा करे भी क्या: असग़र वजाहत

“साथ, यक़ीं, वाबस्तगी, बिकने थे बेदाम/ आज़ादी जो रख दिया, बंटवारे का नाम”… 1947 में विभाजन की क़ीमत पर आज़ादी मिली। आज हम कितने आज़ाद हैं और कितने विभाजित?...

“मणिपुर जल रहा है”

हिंसा पीड़ित मणिपुर का जाएज़ा लेने गयी थीं, भोपाल निवासी कवि और ‘समय के साखी’ की संपादक डॉ. आरती, उनकी डायरी एक पुस्तिका के रूप में हाल ही Notnul...

सीजेपी आन्दोलन और लोकतंत्र का कल

डॉ. वीरेन्द्र कुमार शेखर की कलम से…. सीजेपी आन्दोलन और लोकतंत्र का कल            कुछ घटनाएँ ऐसी होती हैं, जिनका वास्तविक महत्व उनके घटित होने...

जंग-ए-आज़ादी, आज़ादी और उर्दू शायरी

इस बार इस कॉलम में कुछ ऐसी रचनाएं, जो न सिर्फ़ आज़ादी की बात करती हैं बल्कि तक़्सीम-ए-हिंद (भारत विभाजन) पर सवाल भी खड़ा करती हैं; आज़ादी के मतवालों...

प्रधानमंत्री के ‘मन की बात’ के मन में

स्वास्थ्य से जुड़ी हमारी धारणाओं, प्रैक्टिसों, नीतियों और अप्रोच आदि को लेकर यह ब्लॉग लगातार चिंतन प्रस्तुत कर रहा है। ‘आज़ादी का ऑडिट’ अंक में देश की स्वास्थ्य नीतियों...
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