‘आत्मसंभवा आण्डाल’: भक्ति साहित्य में स्त्री-स्वर

पाक्षिक ब्लॉग नमिता सिंह की कलम से…. ‘आत्मसंभवा आण्डाल’: भक्ति साहित्य में स्त्री-स्वर           आज जिस पुस्तक पर चर्चा है वह कथा साहित्य का हिस्सा...

दुनिया भर के चहेते शायर थे बशीर बद्र

डॉ. नौमान की कलम से…. दुनिया भर के चहेते शायर थे बशीर बद्र..            ‘आमद’, ‘इकाई’, ‘इमेज’ शेरी संकलनों के ख़ालिक (रचनाकार) अन्तरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त, पद्मश्री...

नेहरू मानते थे, लेखक का दर्जा प्रधानमंत्री से बड़ा

पीयूष बबेले की कलम से…. जब नेहरू बोले, लेखक का दर्जा प्रधानमंत्री से बड़ा           नेहरू जी स्‍वतंत्रता सेनानी और राजनेता होने के साथ ही...

चर्चा में दो किताबें

पुस्तक चर्चा विवेक रंजन श्रीवास्तव की कलम से…. चर्चा में दो किताबें            “अलेक्सा, प्ले हिट्स ऑफ़ लता…” ड्रॉइंग रूम के किसी कोने से महज़...

कहानी- अंडे वाले मौली साब

बीते जीवन की स्मृतियों से गलबहियाँ करना अर्थात अतीत-राग सुखद अहसास होता है, नॉस्टैल्जिया साहित्य के लिए अत्यंत उपजाऊ विषय है क्योंकि यह रचनात्मकता को जन्म देता है। समकालीन...

सबसे सस्ती रातें

मिस्र के ख्यात लेखक यूसुफ़ इदरीश लिखित कहानी। वादिदा वाशेफ़ द्वारा किये गये अंग्रेज़ी अनुवाद से हिंदी ​अनुवाद प्रस्तुत कर रहे हैं श्रीविलास सिंह… सबसे सस्ती रातें    ...

सीजेपी: व्यंग्य परंपरा और सत्ता का सफ़र

कॉकरोच जनता पार्टी युवाओं के बीच एक सनसनी की तरह उभरी और सोशल मीडिया पर उसके फ़ॉलोअरों की संख्या दो करोड़ तक जा पहुंची तो केंद्र की भाजपा सरकार...

कॉकरोच पार्टी और बेसुरे दौर में ‘मेलोडी’ राग

व्यंग्य विवेक रंजन श्रीवास्तव की कलम से…. कॉकरोच पार्टी और बेसुरे दौर में ‘मेलोडी’ राग             दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के सियासी अखाड़े...

नीरज की दुर्लभ कविता – मिट्टी की कुर्बानी

गूंज बाक़ी… हिंदी कविता और गीत के प्रसिद्ध हस्ताक्षर गोपालदास नीरज की एक भूली-बिसरी रचना। यह रचना ‘सुमित्रा’ पत्रिका के सितम्बर 1952 अंक में ‘मिट्टीवाला’ शीर्षक से प्रकाशित हुई...

नेपोटिज़्म बनाम नैसर्गिक प्रतिभा

विवेक रंजन श्रीवास्तव की कलम से…. नेपोटिज़्म बनाम नैसर्गिक प्रतिभा              जब कोई वरिष्ठ संपादक या साहित्यकार यह कहता है कि सच्चे लेखक को...
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