
आब-ओ-हवा ब्लॉग की पहली किताब.. अनेक की तैयारी
संयोग है कि यह चर्चा विश्व पुस्तक दिवस पर हम कर रहे हैं क्योंकि किताबें अब वितरण के लिए हाथ में हैं… आब-ओ-हवा अपनी शुरूआत से ही ब्लॉग आधारित एक सामयिकी है। इसका कांसेप्ट यह भी रहा कि नियमित ब्लॉग्स के बहाने लेखकों की वैचारिकी पर आधारित किताबें तैयार हो सकें। इसी 15 अप्रैल को आब-ओ-हवा ने अपने दो वर्ष पूरे किये हैं और कितनी सुखद स्थिति है कि आधे दर्जन से ज़्यादा ब्लॉग्स इस स्थिति में हैं कि पुस्तकाकार आ सकते हैं। यह बताते हुए भी हर्ष है कि दो किताबें ऐसी आ चुकी हैं, जो आब-ओ-हवा में नियमित लेखन की ही उपज रही हैं।
दूसरे अंक यानी अप्रैल 2024 से आब-ओ-हवा के लिए राजा अवस्थी ने ‘समकाल का गीत विमर्श’ ब्लॉग लिखना शुरू किया, जिसमें हिंदी कविता की आलोचना का केंद्र में रखते हुए उन्होंने विचारोत्तेजक और चिंतनपरक ब्लॉग नियमित लिखे। ब्लॉग किताब की शक्ल में इस साल पाठकों के हाथ में आया है, शीर्षक है ‘आलोचना का ब्राह्मणवाद’।
बीती 17 जनवरी 2026 को विश्व पुस्तक मेले में कवि-लेखक राजा अवस्थी की तीन किताबों का विमोचन हुआ। इनमें दूसरी किताब है ‘कैकेयी अब बोलती’ और यह भी पहले आब-ओ-हवा में निरंतर प्रकाशित हो चुकी है।
विश्व पुस्तक मेला-2026 में इन दोनों किताबों के विमोचन अवसर पर कवि-लेखक राजा अवस्थी ने कहा, “आलोचना पर केंद्रित निबंधों का संग्रह है ‘आलोचना का ब्राह्मणवाद’। ये सभी आलेख आब-ओ-हवा के लिए लिखे गये थे और दो वर्षों से भी अधिक समय तक एक नियमित कॉलम/ब्लॉग के रूप में प्रकाशित होते रहे।” उन्होंने कहा, “पत्रकार व शायर भवेश दिलशाद के संपादन में प्रकाशित होने वाली पाक्षिकी आब-ओ-हवा के वेबसाइट में (aabohawa.org पर विज़िट करके ब्लॉगज़ीन देखें) तब्दील हो जाने के बाद भी ब्लॉग नियमित जारी रहा और मैंने 30 से अधिक कड़ियां लिखीं। इन्हीं को पुस्तक के रूप में सहेजा गया है।”

अलावा इसके राजा अवस्थी द्वारा संपादित ‘समकालीन हिन्दी ग़ज़ल-पाँच दशक:पाँच क़दम’ शीर्षक पुस्तक भी इसी अवसर पर विमोचित हुई। इस पुस्तक में हिन्दी ग़ज़ल के संदर्भ में 40 पृष्ठों की सम्पादकीय विशेष दृष्टव्य है।
धारावाहिक भी पुस्तकाकार
बक़ौल राजा अवस्थी, ‘कैकेयी अब बोलती’ रामकथा के सर्वाधिक उपेक्षित पात्र कैकेयी पर केंद्रित एक लम्बी कविता है। उल्लेखनीय यह कि यह लंबी कविता आब-ओ-हवा में एक धारावाहिक के रूप में ‘पूर्व पाठ’ शृंखला के अंतर्गत प्रकाशित हुई और ब्लॉगज़ीन के पाठकों के द्वारा बहुत पसंद की गयी। साथ ही, पाठकों ने इस पर विमर्श भी किया। इन बातों का उल्लेख इन किताबों में लेखकीय आत्मकथ्य में तो है ही, विमोचन अवसर पर दिये वक्तव्य में भी लेखक ने आब-ओ-हवा और संपादक के प्रति आभार व्यक्त किया।
विमोचन अवसर पर वरिष्ठ कहानीकार-उपन्यासकार एवं क़िस्सा कोताह के संपादक ए. असफल (ग्वालियर), कवि कमलेश भट्ट कमल, डाॅ. विनय मिश्र (वाराणसी), राहुल शिवाय, ककसाड़ पत्रिका की संपादक कुसुमलता सिंह, मणिमोहन, अशोक शर्मा (जयपुर), कवि लोकनाथ (संतोष द्विवेदी) उमरिया, रोहित आनन्द एवं आरिफ़ा सहित कई साहित्यकारों की उपस्थिति रही। सूचनार्थ, ‘कैकेयी अब बोलती’ लिटिल बर्ड पब्लिकेशन्स, ‘आलोचना का ब्राह्मणवाद’ एवं हिंदी ग़ज़ल पर केंद्रित पुस्तक न्यू वर्ल्ड पब्लिकेशन से प्रकाशित हुई है, जो आनलाइन खरीदी के लिए उपलब्ध हैं।
