फ़िराक़ की शायरी के रहस्य

गूंज बाक़ी… डॉ. जाफ़र रज़ा संपादित किताब ‘बज़्मे ज़िंदगी:रंगे शायरी’ की भूमिका फ़िराक़ गोरखपुरी (28.08.1896-03.03.1982) ने 12 अक्टूबर 1970 को ‘मैं और मेरी शायरी’ शीर्षक से लिखी थी। भाषा...

दुनिया भर के चहेते शायर थे बशीर बद्र

डॉ. नौमान की कलम से…. दुनिया भर के चहेते शायर थे बशीर बद्र..            ‘आमद’, ‘इकाई’, ‘इमेज’ शेरी संकलनों के ख़ालिक (रचनाकार) अन्तरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त, पद्मश्री...

शायरी के निशाने पर ‘कुर्सियाँ’

चुनावी मौसम यूं तो मुल्क में कभी ख़त्म होता नहीं, फिर भी ताजपोशी की हालिया सुर्ख़ियों से ‘कुर्सी’ लफ़्ज़ एकदम से ज़ेह्नों में ताज़ा हो चला है। इस लफ़्ज़...

इंद्रधनुष-9 : नोमान शौक़

इंद्रधनुष-9 : नोमान शौक़ “मेरे नज़दीक इस मुश्किल वक़्त में शायरी करना क़ब्रिस्तान में वायलिन बजाने जैसा है।” यह कहना रहा है हमारे समय के मक़बूल शायर नोमान शौक़...

दृष्टिकोण, आंदोलन, मौलिकता और क़ैफ़ी आज़मी

पाक्षिक ब्लॉग सलीम सरमद की कलम से…. दृष्टिकोण, आंदोलन, मौलिकता और क़ैफ़ी आज़मी          ‘गूंजती आवाज़ें’ में प्रस्तुत आलेख मेरी स्मृति के पन्ने थे, जिन्हें मैं...

इल्म, तजुर्बा, थ्योरी और अख़्तरुल ईमान

पाक्षिक ब्लॉग सलीम सरमद की कलम से…. इल्म, तजुर्बा, थ्योरी और अख़्तरुल ईमान             ज़िंदगी मुझसे कह रही थी कि उम्र सवालों की जा...

ताहिर फ़राज़ को ख़िराज

डॉ. आज़म की कलम से…. ताहिर फ़राज़ को ख़िराज             “ताहिर फ़राज़ ने जनता की साइकी, मनोविज्ञान, माइंड सेट, उनकी प्राथमिकता, उनके मानसिक सरोकारों...
error: Content is protected !!