इंद्रधनुष-12 (विशेष): कमलकांत सक्सेना

इंद्रधनुष-12 (विशेष): कमलकांत सक्सेना “कमलकांत की रचनाएं बहुत नहीं है, सिर्फ़ एक पुस्तक ‘ऋजुता’ नाम से उन्होंंने दी है। इससे उनका साहित्यिक मूल्य कम नहीं हो जाता। उन्होंने हिंदी...

हिंदी पत्रकारिता में ‘अल्पसंख्यक’: संदिग्ध या नागरिक?

ख़बरनामा:200… इस शृंखला के लेख हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्षों के इतिहास की प्रवृत्तियों, सीमाओं, उपलब्धियों और अंतर्विरोधों को समझने का प्रयास हैं। इन लेखों को, इन्हें लिखने वाले...

गांधी और हिंदी सिनेमा: एक यात्रा

प्रसंगवश… मूलत: ‘गांधी के जीवनादर्शों का हिंदी सिनेमा पर प्रभाव’ शीर्षक वाले इस लेख में गांधी के विचारों को परदे पर लाती फ़िल्मों का समाजशास्त्रीय ​विश्लेषण पर्याप्त है। अनहद...

तस्वीरें: पत्थरों में धड़कते गांधी

तस्वीरें: पत्थरों में धड़कते गांधी कश्मीर में लेफ़्टिनेंट गर्वनर मनोज सिन्हा प्रशासन ने हाल ही 25 किताबों को ज़ब्त व प्रतिबंधित किया, कि ये ग़लत नैरैटिव देती हैं, युवाओं...

डीकोडिंग गांधी वाया हिंद स्वराज

प्रसंगवश… मूलत: ‘हिंद स्वराज और महात्मा गांधी’ शीर्षक वाले इस लेख में गांधी के गहन विचारों का अध्ययन एवं ​विश्लेषण पर्याप्त गहनता से है। ‘हिन्द स्वराज’ के शताब्दी वर्ष...

तीन क़िस्से: गांधीजी की दूरदृष्टि, स्पर्श व परिहास

गूंज बाक़ी… साहित्य के ऐतिहासिक पन्नों से नायाब और दिलचस्प क़िस्से खोज लाते हैं विवेक मेहता। आब-ओ-हवा के लिए ‘रंग-बिरंगी’ ब्लॉग की प्रस्तुति ऐसे ही पन्नों की देन है।...

क्या आज़ादी के बाद स्वराज का स्वप्न पूरा हुआ?

अरुण कुमार डनायक की कलम से…. क्या आज़ादी के बाद स्वराज का स्वप्न पूरा हुआ?                ‘स्वराज’ शब्द की जड़ें भारतीय प्राचीन परंपरा...

नज़र रोकिए, पुराने घरों की दीवारों को सुनिए

भोपाल निवासी साहित्यकार विवेक रंजन श्रीवास्तव इन दिनों लंदन प्रवास पर हैं। नियमित लेखन के अभ्यास व स्वभाव के चलते वह उन विचारों/अनुभवों/दृश्यों आदि को दर्ज कर रहे हैं,...
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