एक ‘थे’ गीतकार जगदीश श्रीवास्तव… मध्य प्रदेश के चर्चित गीतकारों में कभी शुमार रहे जगदीश श्रीवास्तव 26 अगस्त को अपने गृहनगर विदिशा में अपने परिजनों एवं मित्रों को छोड़...
प्रेमचंद के बहाने नयी पीढ़ी से साहित्य की बातें महान कथाकार एवं उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद की जयंती साहित्य की दुनिया में एक ऐसा अवसर है, जो आज भी...
गूंज बाक़ी… डॉ. जाफ़र रज़ा संपादित किताब ‘बज़्मे ज़िंदगी:रंगे शायरी’ की भूमिका फ़िराक़ गोरखपुरी (28.08.1896-03.03.1982) ने 12 अक्टूबर 1970 को ‘मैं और मेरी शायरी’ शीर्षक से लिखी थी। भाषा...
भोपाल निवासी साहित्यकार विवेक रंजन श्रीवास्तव इन दिनों लंदन प्रवास पर हैं। नियमित लेखन के अभ्यास व स्वभाव के चलते वह उन विचारों/अनुभवों/दृश्यों आदि को दर्ज कर रहे हैं,...
ग़ज़ाला तबस्सुम को सम्मान, उर्दू पर चिंतन पश्चिम बंगाल के आसनसोल में 23 अगस्त को कल्चर एंड लिटरेरी फ़ोरम ऑफ़ बंगाल की तरफ़ से उर्दू शिक्षाविदों, शायरों और लेखकों...
ख़बरनामा:200… हर शनिवार, इस शृंखला के लेख हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्षों के इतिहास की प्रवृत्तियों, सीमाओं, उपलब्धियों और अंतर्विरोधों को समझने का प्रयास हैं। इन लेखों को इन्हें...
गूंज बाक़ी… इस बार इस सिलसिले में स्व. राधिका प्रसाद वर्मा ‘नटवर’ जी की जयंती (20.08.1920) के अवसर पर एक स्मृति विशेष। कमलकान्त सक्सेना द्वारा संपादित प्रतिष्ठित मासिका पत्रिका...
भोपाल निवासी साहित्यकार विवेक रंजन श्रीवास्तव इन दिनों लंदन प्रवास पर हैं। नियमित लेखन के अभ्यास व स्वभाव के चलते वह उन विचारों/अनुभवों/दृश्यों आदि को दर्ज कर रहे हैं,...
आब-ओ-हवा – अंक – 54 भाषाओं के साथ ही साहित्य, कला और परिवेश के बीच पुल बनाने की एक और ख़ास कड़ी- जिसमें ग्राउंड रिपोर्ट, विश्लेषण, चिंतन, व्यंग्य, डायरी,...