मुशायरे: रिवायत, अहमियत और फ़ायदे

नियमित ब्लॉग डॉ. आज़म की कलम से…. मुशायरे: रिवायत, अहमियत और फ़ायदे मुशायरा उर्दू ज़बान व अदब की एक ज़िंदा और दीप्तिमान रिवायत है, जो शायरी की उन्नति, सांस्कृतिक...

हिन्दी को बनाने दीजिए मुहब्बत का पुल

नियमित ब्लॉग आशीष दशोत्तर की कलम से…. हिन्दी को बनाने दीजिए मुहब्बत का पुल            ज़ुबानें दिलों के बीच एक राब्ता कायम करती हैं। इंसानों...

फ़िराक़ की शायरी के रहस्य

गूंज बाक़ी… डॉ. जाफ़र रज़ा संपादित किताब ‘बज़्मे ज़िंदगी:रंगे शायरी’ की भूमिका फ़िराक़ गोरखपुरी (28.08.1896-03.03.1982) ने 12 अक्टूबर 1970 को ‘मैं और मेरी शायरी’ शीर्षक से लिखी थी। भाषा...

जंग-ए-आज़ादी, आज़ादी और उर्दू शायरी

इस बार इस कॉलम में कुछ ऐसी रचनाएं, जो न सिर्फ़ आज़ादी की बात करती हैं बल्कि तक़्सीम-ए-हिंद (भारत विभाजन) पर सवाल भी खड़ा करती हैं; आज़ादी के मतवालों...

इंद्रधनुष-10 : शकील जमाली

इंद्रधनुष-10: शकील जमाली ग़ज़ल ने पिछली कुछ दहाइयों से जो नया लहजा, नया रंग इख़्तियार किया है, जिसे विद्वान जदीद शाइरी भी कहते हैं, उसने अपना एक ख़ानदान बना...

‘दुनिया मुट्ठी में’ या मुट्ठी से फिसलती दुनिया?

पाक्षिक ब्लॉग आशीष दशोत्तर की कलम से…. ‘दुनिया मुट्ठी में’ या मुट्ठी से फिसलती दुनिया? इंसानी ज़िंदगी में बहुत ज़्यादा तब्दीलियां हो चुकी हैं। किसी वक़्त जब टेलीविज़न आया...

शायरी के निशाने पर ‘अख़बार’

हिंदी पत्रकारिता दिवस… 200 साल की हो गयी हिंदी की पत्रकारिता और कहां से कहां पहुंच गयी! भले ही अब मीडिया जैसे शब्द प्रच​लन में हैं पर अख़बार शब्द...

बोलती, ठहरती, दिखती, छुपती आवाज़

पाक्षिक ब्लॉग आशीष दशोत्तर की कलम से…. बोलती, ठहरती, दिखती, छुपती आवाज़ ग़ौर से सुनिए। कोई आवाज़ दे रहा है। यह आवाज़ तो जानी-पहचानी-सी लग रही है। कब सुनी...
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