दानुबे नदी किनारे बसी संस्कृति विएना
पाक्षिक ब्लॉग रति सक्सेना की कलम से.....

दानुबे नदी किनारे बसी संस्कृति विएना

           रोम से विएना की दूरी कम नहीं है, लेकिन ट्रेन से क़रीब 12 घण्टे में पहुँच गये। आस्ट्रिया बाक़ी यूरोप की भाँति थोड़ा ठंडा था। स्टेशन पर उतरकर मैं पीटर और हनाने का इंतज़ार करने लगी। पीटर इंग्लिश है और हनाने लेबनान की कवयित्री हैं। पीटर पिछले दो वर्षों से कृत्या पोइट्री फ़ेस्टिवल में भाग ले रहा है। दोनों ने पिछले साल ही शादी की थी।

नया-नया शहर काग़ज़ की पुड़िया की तरह तुरंत नहीं खुल जाता है, उसे प्याज़ की तरह परत दर परत उतारना पड़ता है। फिर सभी यूरोपीय शहर एक नज़र में क़रीब-क़रीब एक-से लगते हैं। पीटर क़रीब तीन जगहों पर पढ़ाते हैं, और साथ में जर्मन से अंग्रेज़ी में अनुवाद भी करते हैं। पीटर की विशेषता साउण्ड पोइट्री है, पहली नज़र में यह कवि खिलन्दड़ी कविता करता-सा लगेगा। अजीब-अजीब-सी आवाज़ों को कविता का नाम देता हुआ, लेकिन विएना में आने के बाद मालूम हुआ कि पीटर कविता के लिए कितने समर्पित हैं, वे महीने में दो बार कॉफ़ी हाउस में कविता का आयोजन करते हैं, और एक-दो बार कविता लेखन की कार्यशाला भी। कविता के साथ जितने भी प्रयोग संभव हैं, पीटर उन्हें करना चाहते हैं। पीटर ने अपने काम से लौटने के बाद मेरे रहने के लिए कमरा ख़ाली किया।

मैं थोड़ा शर्मिन्दा-सा महसूस कर रही हूँ कि मेरे आने से पीटर को समस्या हो गयी होगी। कमरा छोटा, लेकिन अच्छा था। हम लोग खाना खाने बाहर गये। यूरोपीय आचार यह है कि सब लोग अपने खाने का पैसा ख़ुद देते हैं, और मैं यह जानती थी। खाने के बाद मेरी आइसक्रीम खाने की इच्छा हुई, क्योंकि यूरोप की आइसक्रीम बढ़िया होती है। मैं अवलीन के साथ आइसक्रीम पार्लर में चली गयी, जहाँ एक वेटर बाक़ायदा नाक छिदाये हुए, बिन्दी लगाये हुए थी। हमें देखते ही उसने पूछा कि क्या हम इण्डिया से आये हैं? हमारे हाँ कहने पर बताने लगी कि वह हर साल भारत जाती है, वहाँ उसने एक गुरु भी बनाया है, जिनसे योग आदि सीखती है।

मैं यह अनुभव कर रही थी कि पश्चिमी देशों के अमीर यात्री नॉर्वे, विएना आदि यूरोपीय देशों की यात्रा करते हैं, लेकिन कामगार, मज़दूर क़िस्म के लोग भारत, पाकिस्तान आदि आते हैं। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि भारत इन देशों के मुक़ाबले काफ़ी सस्ता है और कम पैसों में ज़्यादा सुविधा प्राप्त की जा सकती है।

झीलें, इमारतें और ​इतिहास

शाम को मैं और हनाने झील के किनारे सैर के लिए निकल गये। विएना नदियों या झीलों का शहर कहा जा सकता है। यह दानुबे नदी तट पर बसी संस्कृति है। कहा जाता है क़रीब दो हज़ार साल पहले रोम साम्राज्य ने इस स्थान पर सैनिक छावनी बनायी, जिसका उद्देश्य रोमवासियों को जर्मन आदिवासियों से बचाना और रोम की सुरक्षा था। बाद में छावनी तो नष्ट हो गयी, लेकिन शहर की रूपरेखा काफ़ी कुछ सैनिक छावनी-सी बनी रही। यहाँ हंगेरियन, डच और जर्मन, सभी ने थोड़े-थोड़े समय राज्य किया। 1156 में हेनरिच ने इस इलाक़े की समृद्धि के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया।

अनेक राज्य परिवर्तनों के उपरान्त Habichtsburg के राजा Rudolf 1 के साथ Habsburg राज्य का आरंभ हुआ जो 1918 तक चला। विएना की समृद्धि और वृद्धि में अनेक राजाओं का योगदान रहा, विशेष रूप से यह स्थान यूरोपीय देशों को तुर्क आक्रमणों से रोकने का प्रमुख केन्द्र बना रहा। तुर्कों के आक्रमणों और ब्लैक प्लेग आदि से जूझने वाले इस प्रान्त को 1683 में तुर्कों को पूरी तरह पराजित करने का अवसर मिला, तत्पश्चात ब्लैक प्लेग बराख (Baroque) खड़ा किया गया, जो कि शिल्पकला का अद्भुत नमूना है। इस बराख का उद्देश्य था, स्वर्ग को ज़मीं पर उतार लाने की कोशिश।

इस शहर की सबसे बड़ी विशेषता है यहाँ की इमारतों का शिल्प कौशल, हर इमारत किसी न किसी ख़ास ओहदेकार द्वारा बनवायी गयी है। ये उनके सार्वजनिक महत्व को साबित करने का एक सुन्दर उपाय भी है। मुझे बीकानेर की हवेलियाँ याद आती हैं, जिन्हे सेठों ने बनवाया। संकरी गलियों में खड़ी ये हवेलियाँ अपने विदेश में बसने वाले स्वामी सेठों की समृद्धि का भी बखान करती हैं। मैंने अधिकतर इमारतों के स्तम्भों पर देवदूतों जैसी आकृतियाँ देखीं। स्वर्ग की कल्पना हर किसी के मानस में रही होगी। धीरे-धीरे यह इलाक़ा यूरोपीय संभ्रान्त लोगों के घूमने फिरने का स्थान बन गया। आज भी विएना का प्रमुख उद्योग पर्यटन है।

मोज़ार्ट का संग्रहालय

हम लोग रात का खाना घर पर ही खाते हैं, ब्रेड और सलाद के साथ तरह-तरह की चीज़।
दूसरे दिन सुबह 10 बजे तक घर में कोई हलचल सुनायी नहीं देती, मैं वक़्त पर उठ जाती हूँ, लेकिन खटपट नहीं करती। क़रीब ग्यारह बजे पीटर उठकर आते हैं और चाय आदि के लिए पूछते हैं। वे बताते हैं कि अवलिन हम लोगों को घुमाने के लिए ले जाएगी। थोड़ी देर में अवलिन भी आ जाती है। मैंने पीटर के कहने पर कल ही तीन दिन का टिकट खरीद लिया था, हम लोग शहर के बीचो-बीच सेन्टपीटर चर्च पहुँचे, और वहाँ से गलियों में होते हुए मोज़ार्ट के म्यूज़ियम गये।

मोज़ार्ट म्यूज़ियम उनके ही घर में बनाया गया है। यह घर विएना के समृद्ध लोगों के घरों के समान कई मंज़िला है। Wolfgang Amadeus Mozart छह वर्ष की उम्र में सन् 1762 में अपने पिता के साथ विएना आये थे। उनका विएना में आगमन म्यूज़िकल वण्डर काइण्ड के रूप में जाना गया। बारह वर्ष की उम्र में वे आरफ़ेन्ज़ मास का आयोजन करने में समर्थ थे। 1781 में उन्होंने विएना में रहकर स्वतंत्र रूप से संगीत कम्पोज़िशन का कार्य शुरू कर दिया। उन्होंने क़रीब 300 संगीत कम्पोज़िशन तैयार कर लिये। मोज़ार्ट के संगीत की विशेषता थी मानवीयता और स्वतंत्रता। मोज़ार्ट के म्यूज़ियम में उनके जीवन सम्बन्धी सभी वस्तुओं का प्रदर्शन किया गया है। कोई सन्देह नहीं कि वे एक महान कलाकार थे। काफ़ी कुछ कमाने के बावजूद भी वे जीवन के अन्त समय तक बेहद तंगहाली की स्थिति में आ गये थे।

मैं सोच रही थी रवींन्द्रनाथ ठाकुर के अलावा शायद ही कोई कलाकार होगा, जिसको हमने इतने महत्व के साथ प्रस्तुत किया हो। अठारहवीं सदी में विएना यूरोपियन संगीत का केन्द्र था। Haydn, Mozart, Beethoven, Schubert, Brucker, Brahms and Strauss आदि विश्वचर्चित नाम विएना से जुड़े हैं।

दानुबे नदी किनारे बसी संस्कृति विएना

काफ़ी हाउस और विविध व्यंजन

मोज़ार्ट म्यूज़ियम के उपरान्त हम लोग कॉफ़ी हाउस में खाना खाने गये। यूरोप के कॉफ़ी हाउस की अपनी अलग कहानी है, यहाँ कोई व्यक्ति कितने भी समय के लिए कॉफ़ी हाउस में बैठ सकता है। मैंने कॉफ़ी हाउस में वृद्धों की उपस्थिति को ज्यादा पाया। संभवतया यह उनके समय बिताने का अच्छा स्थान होगा। भारत में भी एक समय कॉफ़ी हाउस साहित्यकारों के अड्डे हुआ करते थे। विष्णु प्रभाकर जी के पास कॉफ़ी हाउस सम्बन्धी काफ़ी यादें थीं। शाम को काफ़्का कैफ़े में हमारा कविता पाठ था। काफ़्का कैफ़े, कॉफ़ी हाउस की तर्ज़ पर एक छोटा-सा रेस्तरां था, जिसके मालिक साहित्यिक रुचि वाले थे। अवलिन ने कुछ कविताओं का जर्मन में अनुवाद किया था, मैंने एक दो कविताएँ हिन्दी में पढ़कर बाक़ी का अंग्रेज़ी में पाठ किया। छोटी जगह में भी अच्छे श्रोता थे।

दूसरे दिन शनिवार की छुट्टी थी। पीटर ने अपने कुछ साहित्यिक मित्रों को बुलाया था। शाम होने पर पीटर आए और मैंने कहा कि यदि वे चाहें तो मैं कुछ भारतीय खाना बना सकती हूँ। मैं और पीटर पास के स्टोर में सामान खरीदने गये। नॉर्वे में रोटी बनाने के अनुभव ने यह सिखा दिया था, रोटी बनाने की जगह सब्ज़ी के साथ ब्रेड खाना अच्छा रहेगा। हमने मुर्गी, टमाटर, ब्रेड और दही, खीरा खरीदा। दूध का पैकेट देखकर लगा कि खीर भी बनायी जा सकती है। घर आकर मैंने चिकन बनाने की तैयारी की और साथ ही चावल पकाने भी रख दिया। वहाँ का चावल देखकर अन्दाज़ा हो गया था कि जल्दी नहीं पकेगा। इसलिए चावल को दूध में डालने से पहले ही उबाल लिया। धीरे-धीरे अतिथियों का आगमन शुरू हो गया। सभी अपने साथ कुछ न कुछ पकवान लाये थे। समूहों में बातचीत का दौर शुरू हो गया, तो पीटर ने सबको खाने के लिए आमंत्रित किया।

खाते- खाते दस तो बज गया होगा क्योंकि कई कोर्स में खाना खाया गया। अन्त पीटर की मित्र विक्की द्वारा बनायी आइसक्रीम के साथ हुआ।

लेकिन एक मित्र तो अभी जमे ही थे, ये पीटर के आर्किटेक्ट मित्र Bernhard Widder। इस बार उन्होंने भारतीय संस्कृति, भारतीय जाति प्रथा से लेकर कामसूत्र, धर्मशास्त्र आदि के विरोध पर सवाल करने शुरू कर दिये। वे जानना चाहते थे कि इतनी गहन सांस्कृतिक विरासत वाले देश में इतनी अराजकता क्यों है। मुझे उनकी बातों का जवाब देते-देते सुबह हो गयी। मुझे फिर से भूख लगने लगी थी। Bernhard दो बार दरवाज़े तक पहुँचे और फिर लौट आये। अब तो मेरे लिए सहन करना मुश्किल हो गया तो मैं कमरे में जाकर सो गयी। सुबह छह बजे बुलावा आया कि वे जा रहे हैं। पता चला कि उनके समूह में ऐसी गोष्ठियां आम बात है, जबकि वे सभी अलग-अलग देश से आये हुए हैं, लेकिन विएना में एक समूह बना रखा है।

किताबें और चर्च

दूसरे दिन मैंने पीटर को कहा कि मैं बाहर जाना चाहती हूँ, मैने पास खरीद ही लिया है। दुकानें, शॉपिंग मॉल्स, स्ट्रीट फ़ूड और फिर एक बहुमंज़िला पुस्तकों की दुकान और पुस्तकालय। मैं काफ़ी देर कविता की किताबें खोजती रही, अन्त में सहायिका की मदद से एक अलमारी में कविता की क़रीब तीस-चालीस पुस्तकें मिलीं। बड़ी संख्या में लोग किताबें पढ़ रहे थे और बच्चों के लिए अलग सैक्शन था। दुकान होते हुए भी यहाँ बेहद शान्ति थी। मैं काफ़ी देर इस पुस्तकालय में बैठी रही।

विएना की चॉकलेट अच्छी मानी जाती है, इसलिए मैंने कुछ पैकेट खरीदे। सड़क के किनारे-किनारे चलती रही, तो एक ऐसे बाज़ार में जा पहुँची, जहाँ फैशन के कपड़े और पर्स, आभूषण आदि सामान थे। हर दूकान म्यूज़ियम-सी सजायी हुई थी।

मैं घूमती-फिरती कहाँ पहुँच रही थी, मुझे मालूम ही नहीं पड़ रहा था। मैंने पीटर का दिया काग़ज़ पढ़ने की कोशिश की, लेकिन कुछ समझ में नहीं आया। तभी एक दुकान में एक सांवली-सी लड़की दिखायी दी। मुझे समझ आ गया कि वह केरलीय है। मैंने उससे सेन्ट पीटर चर्च का पता पूछा। तभी पीटर का फ़ोन आया कि वह और हनाने आ रहे हैं, मैं उन्हें चर्च के पास मिलूँ।

सेन्ट पीटर चर्च और सेन्ट स्टीफ़न केथेड्रल शहर के केन्द्र में हैं। रोम में रॉबर्टो ने एक बात बतायी थी कि अधिकतर चर्चों में प्राचीन रोमन मन्दिरों के भग्नावशेष हैं। युद्ध में धर्म की अहम भूमिका को इतिहास कब नकारता है? इस चर्च में Emperor Frederik-III की समाधि भी है। चर्च का कुछ हिस्सा उत्तम कलाकारी से अलंकृत है। पीटर बताते हैं इन चर्चों का सबसे ख़ूबसूरत हिस्सा छत पर की गयी कलाकारी होती है क्योंकि छत को स्वर्ग की कल्पना के अनुरूप बेहद सुन्दर बनाने की कोशिश की जाती है।

चर्च के बाहर बड़ा-सा चौगान है, जिसमें लघु प्रदर्शिनियाँ लगायी जाती हैं, करतब दिखाये जाते हैं। और एक बात जो मैंने रोम और विएना दोनों जगह देखी, वह थी कि कुछ लोग पैसा कमाने के लिए ग्रीक मूर्ति या किसी रोमन योद्धा का मेकअप कर अपने को पूरी तरह से कपड़ों से ढ़ँककर मूर्ति-से बने खड़े रहते हैं। यह भीख माँगने का कलात्मक तरीक़ा है। नॉर्वे में, रोम में और विएना में सभी जगह दिखायी दिये भिखारियों के बारे में कहा गया कि वे रोमानिया से आते हैं, बस भीख माँगने के लिए। वे सब अच्छे कपड़े पहने होते हैं और देखने में भले-चंगे लगते हैं।

भारत पर कविता और विमर्श

मुझे एक से बढ़कर एक भव्य इमारतें दिख रहीं थीं। सभी आकर्षक थीं। मेरा कैमरा रोम में ही ख़राब हो गया था, इसलिए फ़ोटो भी नहीं ले पा रही थी। यह साइन्स म्यूज़ियम है, इसके तुरन्त सामने आर्ट्स म्यूजिय़म है। Hofburg Museum के भीतर अनेक म्यूज़ियम हैं। पीटर बता रहे हैं- यह Danubius Fountain, यह ओपेरा हाउस है, और यह पुराने मन्दिर का भग्नावशेष है। हम लोग पहले यहाँ कविता की बैठक किया करते थे। मुझे याद आया कि रोम में रॉबर्टो ने भी यही बताया कि वे कोलोसियम के अहाते में नदी के तीर पर कविता की बैठक करते थे। मुझे कविता पाठ का यह तरीक़ा बेहद अच्छा लगा। पीटर ने मेरे लिए 35 यूरो का दो घण्टे वाला टूर बुक करवा दिया।

आज कविता रचना का विषय इण्डिया था। सबसे पहले उन्होंने कंप्यूटर पर बाबी के खींचे चित्रों को दिखाया। ये चित्र पीटर के मित्र बाबी ने अट्ठारह बरस की उम्र में खींचे थे। जैसा कि प्राय: होता है, इन चित्रों में भिखारी, साधु, ग़रीबी रेखांकित थे। यह उस इण्डिया की कहानी है, जो ज़्यादातर पब्लिक स्थानों पर दिखता है। विदेशी कैमरों को इसी में आनन्द मिलता है। इसके बाद पीटर के द्वारा खींचे गये चित्र दिखाये गये। इनमें विषय क़रीब वे ही थे, लेकिन कलात्मकता अधिक थी। मैं जानती हूँ सड़कों पर लगे कचरे के ढेर यह समझने का मौक़ा भी नहीं देते कि भारत में पढ़े-लिखे, समझदार लोग भी रहते हैं।

इसके बाद किसी बांगला डायरेक्टर द्वारा बनायी गयी आर्ट फ़िल्म दिखायी गयी, मुझसे फ़िल्म के हर दृश्य को समझाने के लिए कहा गया। मैंने चाट, पानी पूरी से लेकर काली पूजा तक का अर्थ समझाया और कहा कि यह भारत की संस्कृति की छोटी-सी झलक है।

अवलिन लगातार इण्डिया की जनसंख्या के बारे में कमेण्ट दे रही थी, मेरे लिए बर्दाश्त करना मुश्किल हो गया तो मैंने पूछा- तो क्या करना चाहिए, सभी को मार देना चाहिए? जनसंख्या तानाशाही द्वारा ख़त्म तो नहीं होती। हम चीन की तरह तानाशाही हुक्म नहीं दे सकते थे। दुनिया का सबसे बड़ा लोकतन्त्र है भारत में।

अब उन लोगों ने अपनी कविताएं जो इण्डिया विषय पर लिखी गयी थीं, पढ़नी शुरू कीं… कविताएँ काफ़ी सपाटबयानी-सी लगीं। मैंने कहा कि हम भारतीय कविता में ज़िन्दगी का पेंच लाते हैं, स्थिति को बयान करने के लिए शब्दों मे रस लाते हैं। मैंने कुछ कविताएँ पढ़कर सुनायीं, और भारतीय कविता में भावों के महत्व की बात बतायी। मुझे ज़रा सन्तोष हुआ कि मैं अपने देश के लिए बोल पायी। स्लमडॉग मिलेनियर की बात हर जगह हुई, मेरा यही कहना था कि स्लम हर जगह नहीं हैं। केरल में शायद ही कोई स्लम होगा। फिर मैंने कहा इस सिनेमा का उज्ज्वल पक्ष यह है कि यह ज़िन्दगी की किताब से पढ़ने को कहता है, काग़ज़ी विद्या से ज़्यादा महत्वपूर्ण ज़िन्दगी की सिलेट पर लिखा ज्ञान होता है।

रति सक्सेना, rati saxena

रति सक्सेना

लेखक, कवि, अनुवादक, संपादक और वैदिक स्कॉलर के रूप में रति सक्सेना ख्याति अर्जित कर चुकी हैं। व्याख्याता और प्राध्यापक रह चुकीं रति सक्सेना कृत कविताओं, आलोचना/शोध, यात्रा वृत्तांत, अनुवाद, संस्मरण आदि पर आधारित दर्जनों पुस्तकें और शोध पत्र प्र​काशित हैं। अनेक देशों की अनेक यात्राएं, अंतरराष्ट्रीय कविता आंदोलनों में शिरकत और कई महत्वपूर्ण पुरस्कार/सम्मान आपके नाम हैं।

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