‘लड़ते हुए लोग’ श्रमिक संघर्ष की कहानियाँ

पाक्षिक ब्लॉग नमिता सिंह की कलम से…. ‘लड़ते हुए लोग’ श्रमिक संघर्ष की कहानियाँ।         संघर्षरत औद्योगिक श्रमिकों पर केंद्रित कहानी-संग्रह ‘लड़ते हुए लोग’ की कहानियों...

‘ज़हरीले खाने’ का डर, क्या है पूरा सच?

यह लेख दिखाता है कैसे चयनात्मक घटनाएँ, भावनात्मक भाषा, दोहराये गये नैरेटिव और समन्वित ऑनलाइन प्रवर्धन” (coordinated online amplification) मिलकर जनता का भरोसा पारंपरिक खाद्य व्यवस्था से कमज़ोर कर...

ईरानी सिनेमा में प्रतिरोध और मानवतावाद

प्रासंगिकता के चलते आब-ओ-हवा पर प्रस्तुति के लिए ‘हम देखेंगे’ पत्र से विशेष रूप से प्राप्त, ईरानी सिनेमा पर यह चर्चा सुधन्वा देशपांडे की कलम से निकली है, जिसका...

दुर्लभ भारतीय फिल्म क्यों है ‘आँखों देखी’?

21वीं सदी के 25 वर्षों में से वो 25 भारतीय फ़िल्में, जो टर्निंग पॉइंट साबित हुईं। एक युवा फ़िल्मकार की दृष्टि से चयन और इन फ़िल्मों का दस्तावेज़ीकरण… पाक्षिक...

चार्ली चैपलिन: परदे के पीछे की पूरी कहानी

पाक्षिक ब्लॉग चारु शर्मा की कलम से…. चार्ली चैपलिन: परदे के पीछे की पूरी कहानी नमस्कार साथियो, कैसे हैं आप सब? दोस्तो, सिनेमा – विश्वकथा की शृंखला में हम...

मंटो की वह किताब, जिससे जन्मी नयी विधा

पाक्षिक ब्लॉग डॉ. आज़म की कलम से…. मंटो की वह किताब, जिससे जन्मी नयी विधा सआदत हसन मंटो उर्दू कथा साहित्य (अफ़सानवी अदब) के नायक हैं। प्रेमचंद के बाद...

सिनेमा में व्यंग्य: भारतीय संदर्भ में अध्ययन-2

पाक्षिक ब्लॉग अरुण अर्णव खरे की कलम से…. सिनेमा में व्यंग्य: भारतीय संदर्भ में अध्ययन-2         इस लेख की पिछली कड़ी में सामाजिक, राजनीतिक और दार्शनिक...
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