अख़बारनवीसी: वे एक सौ अड़सठ साल

पेज 1 से आगे………. राजेश बादल की कलम से…. अख़बारनवीसी: वे एक सौ अड़सठ साल दूसरा खंड उर्फ़ तिलक युग बहरहाल! आगे बढ़ते हैं। तिलक युग की पत्रकारिता याने...

अख़बारनवीसी: वे एक सौ अड़सठ साल

‘हिंदी पत्रकारिता के 200 साल’ के संदर्भ में विशेष प्रस्तुति… यह आलेख ‘समग्र भारतीय पत्रकारिता’ ग्रन्थ की समीक्षा नहीं, बल्कि इस नायाब धरोहर के बहाने भारतीय पत्रकारिता के 200...

उर्दू अदब में एक ही मंटो है

गूंज बाक़ी… इस लेख के लेखक उर्दू के मशहूर कहानीकार कृश्न चंदर हैं। यह लेख ‘मंटो साब दोस्तों की नज़र में’ किताब में संकलित है। उर्दू से हिन्दी लिप्यंतरण...

शायरी के निशाने पर ‘कुर्सियाँ’

चुनावी मौसम यूं तो मुल्क में कभी ख़त्म होता नहीं, फिर भी ताजपोशी की हालिया सुर्ख़ियों से ‘कुर्सी’ लफ़्ज़ एकदम से ज़ेह्नों में ताज़ा हो चला है। इस लफ़्ज़...

वैश्विक संकट, नया मंत्र- सब बनें ‘वित्त मंत्री’

विवेक रंजन श्रीवास्तव की कलम से…. वैश्विक संकट, नया मंत्र- सब बनें ‘वित्त मंत्री’              प्रधानमंत्री द्वारा देश के नाम संबोधन में की गयी...

अध्ययन को व्यसन बना देने वाली किताब

(विधाओं, विषयों व भाषाओं की सीमा से परे… मानवता के संसार की अनमोल किताब -धरोहर- को हस्तांतरित करने की पहल। जीवन को नये अर्थ, नयी दिशा, नयी सोच देने...

महान विरासत और बंगाल इन दिनों

विवेक रंजन श्रीवास्तव की कलम से…. महान विरासत और बंगाल इन दिनों            बंगाल में ही जन्मे स्वामी विवेकानंद ने ‘शिकागो व्याख्यान’ के ज़रिये विश्व...

राजशक्ति विरोध… टैगोर की चिट्ठी शरतचंद्र के नाम

गूंज बाक़ी… यह महत्वपूर्ण पत्र रबींद्रनाथ ठाकुर उर्फ़ टैगोर ने प्रसिद्ध लेखक शरतचंद्र को लिखा था, जो आब-ओ-हवा के अगस्त 2024 अंक में (‘उम्मीदें’ से साभार) प्रकाशित किया गया...
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