‘दुनिया मुट्ठी में’ या मुट्ठी से फिसलती दुनिया?

पाक्षिक ब्लॉग आशीष दशोत्तर की कलम से…. ‘दुनिया मुट्ठी में’ या मुट्ठी से फिसलती दुनिया? इंसानी ज़िंदगी में बहुत ज़्यादा तब्दीलियां हो चुकी हैं। किसी वक़्त जब टेलीविज़न आया...

‘ऐल्गी ट्री’ बनेंगे शहरों के नये फेफड़े?

पाक्षिक ब्लॉग विवेक रंजन श्रीवास्तव की कलम से…. ‘ऐल्गी ट्री’ बनेंगे शहरों के नये फेफड़े?            कंक्रीट के जंगलों में तब्दील होते जा रहे आधुनिक...

हिंदी पत्रकारिता नहीं, मानसिकता के 200 साल

पेज 1 से आगे………. निबंध अजय शर्मा की कलम से…. हिंदी पत्रकारिता नहीं, मानसिकता के 200 साल             हिंदी पत्रकारिता में “महिला” भी दरअसल...

हास्य-व्यंग्य का शाहकार इब्न-ए-इंशा की यह किताब

पाक्षिक ब्लॉग डॉ. आज़म की कलम से…. हास्य-व्यंग्य का शाहकार इब्न-ए-इंशा की यह किताब “उनकी प्रवाहमयी गद्य शैली ने अनगिनत सुंदर, लेकिन अब अप्रचलित और भुला दिये गये शब्दों...

उपन्यास ‘चौरंगी’ और शंकर का जाना

मासिक ब्लॉग निशांत कौशिक की कलम से…. उपन्यास ‘चौरंगी’ और शंकर का जाना मुझे शंकर के बारे में पहली बार लगभग 2011 में पता चला, जब द हिन्दू में...

हिंदी पत्रकारिता नहीं, मानसिकता के 200 साल

हिंदी पत्रकारिता के 200 साल के सफ़र पर यह उड़ती-सी नज़र उस शख़्स की है, जिसने 1996 से 2019 तक सक्रिय तौर पर ज़िले से लेकर राजधानी तक हिंदी...

व्यंग्य की काव्य-यात्रा: कबीर से समकाल तक

पाक्षिक ब्लॉग अरुण अर्णव खरे की कलम से…. व्यंग्य की काव्य-यात्रा: कबीर से समकाल तक          गद्य-व्यंग्य के सुव्यवस्थित रूप में विकसित होने से बहुत पहले...

दानुबे नदी किनारे बसी संस्कृति विएना

पाक्षिक ब्लॉग रति सक्सेना की कलम से….. दानुबे नदी किनारे बसी संस्कृति विएना            रोम से विएना की दूरी कम नहीं है, लेकिन ट्रेन से...
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