सीजेपी आन्दोलन और लोकतंत्र का कल

डॉ. वीरेन्द्र कुमार शेखर की कलम से…. सीजेपी आन्दोलन और लोकतंत्र का कल            कुछ घटनाएँ ऐसी होती हैं, जिनका वास्तविक महत्व उनके घटित होने...

व्यंग्य का दरोगा

व्यंग्य-कथा संजीव परसाई की कलम से…. व्यंग्य का दरोगा            दरोगा-राज में सब सुखी थे। लोग ले-देकर अपने काम आसानी से करवा लेते। देने वाले...

हिंदी ग़ज़ल के गिरोह की भावना

नियमित ब्लॉग ज्ञानप्रकाश पांडेय की कलम से…. हिंदी ग़ज़ल के गिरोह की भावना             डॉ. भावना की हैसियत बिहार में परवीन शाकिर से कहीं...

जंग-ए-आज़ादी, आज़ादी और उर्दू शायरी

इस बार इस कॉलम में कुछ ऐसी रचनाएं, जो न सिर्फ़ आज़ादी की बात करती हैं बल्कि तक़्सीम-ए-हिंद (भारत विभाजन) पर सवाल भी खड़ा करती हैं; आज़ादी के मतवालों...

प्रधानमंत्री के ‘मन की बात’ के मन में

स्वास्थ्य से जुड़ी हमारी धारणाओं, प्रैक्टिसों, नीतियों और अप्रोच आदि को लेकर यह ब्लॉग लगातार चिंतन प्रस्तुत कर रहा है। ‘आज़ादी का ऑडिट’ अंक में देश की स्वास्थ्य नीतियों...

सिनेमा को ‘वैचारिक’ बनाने वाला पहला फ़िल्मकार

पहले विश्वयुद्ध के बीच रूस की क्रांति ने एक फ़िल्मकार को उभारा, जिसने पहली बार सिनेमा को वैचारिकी का माध्यम बनाने का सफ़र शुरू किया। इस सफ़र में वह...

‘मुल्क’ से बदलते सिनेमा का अनुभव

सिनेमा जगत में एक ख़ास तरह की फ़िल्मों के लिए पूरी आज़ादी का माहौल है तो दूसरी ख़ास तरह की फ़िल्मों के लिए पूरी पाबंदी का। इस बीच एक...
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